सागर में बकरीपालन तकनीकी प्रशिक्षण से महिलाओं की आजीविका में बदलाव !

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सागर, 05 मार्च 2025: सागर जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से बकरीपालन का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल महिला समूहों को संगठित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में बकरीपालन को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है, जिससे उनकी आजीविका सशक्त हो सके।

कलेक्टर की पहल: महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए तकनीकी कौशल

सागर जिले के कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने बताया कि महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए उनके मौजूदा आय स्रोतों को और प्रभावी बनाना बहुत जरूरी है। इस दिशा में, महिलाओं को बकरीपालन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जा रही है ताकि वे इसे एक संगठित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपना सकें। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नई दिशा और आय का स्रोत बन रही है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पहल

म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की सागर इकाई द्वारा बकरी पालन संकुल निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। वर्तमान में जिले में 300 से अधिक हितग्राही पहले से ही बकरीपालन से जुड़े हुए हैं। इन हितग्राहियों को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे अपने बकरी पालन कार्य को और अधिक लाभकारी बना सकें।

उदाहरण के रूप में बकरीपालक महिलाएं

  • ग्राम आगासोद, बीना: श्रीमती सपना वंशल, जो वैष्णवी स्व. सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं, पिछले 10 वर्षों से बकरीपालन कर रही हैं। वर्तमान में उनके पास 50 बकरियां हैं और वे इस व्यवसाय से अच्छी आमदनी प्राप्त कर रही हैं।
  • लक्ष्मी समूह, बीना: श्रीमती राधा पाल के पास 80 बकरियां हैं और वे पिछले 12 वर्षों से इस कार्य में लगी हुई हैं। बकरीपालन से उन्हें आर्थिक लाभ हो रहा है और उनके परिवार की स्थिति में सुधार आया है।
  • ग्राम करैया, जैसीनगर: श्रीमती कुशुम रानी 15 वर्षों से बकरीपालन कर रही हैं और वर्तमान में उनके पास 35 बकरियां हैं। यह व्यवसाय उनके परिवार के लिए स्थिर आय का स्रोत बन चुका है।
  • ग्राम जगथर: श्रीमती राजरानी सौर, जो आरती समूह से जुड़ी हैं, के पास 40 बकरियां हैं और वे इस व्यवसाय से अच्छी आमदनी हासिल कर रही हैं।

प्रशिक्षण का महत्व: तकनीकी कौशल से सशक्त महिलाएं

बकरीपालकों को दिए जा रहे इस तकनीकी प्रशिक्षण में प्रमुख रूप से उन्नत पशुपालन, टीकाकरण, संतुलित आहार, रोगों की पहचान और उपचार, और देशी तकनीकी से पशुओं का उपचार जैसे विषयों पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रशिक्षक डॉ. रूद्रप्रयाग चंदेल (जूनियर वेटनरी ऑफिसर) और श्री शेख रिजवान (वेटनरी असिस्टेंट) द्वारा यह प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बकरीपालकों को यह समझाना है कि उन्नत नस्ल के नर बकरों की पहचान करना, नस्ल सुधार करना, और बकरियों का सही तरीके से देखभाल करना कितना महत्वपूर्ण है। पहले बकरीपालक इन पहलुओं पर विशेष ध्यान नहीं देते थे, लेकिन अब उन्हें इन तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है।

टीकाकरण और स्वास्थ्य देखभाल पर जोर

बकरीपालकों को टीकाकरण, बकरियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने, और आवश्यक दवाओं के उपयोग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे बकरियों की उत्पादकता बढ़ेगी और बकरियां स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्त रहेंगी, जिससे बकरीपालकों की आय में वृद्धि होगी। इसके अलावा, टीकाकरण और नस्ल सुधार से बकरियों की संख्या में भी वृद्धि होगी और उनका उत्पादक स्तर भी बेहतर होगा।

समूहों के लिए लाभकारी परिणाम

इस प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य यह है कि महिला समूहों को बकरीपालन के माध्यम से अधिक से अधिक आय प्राप्त हो सके। पहले महिलाएं बकरीपालन को सिर्फ एक पारंपरिक कार्य मानती थीं, लेकिन अब उन्हें यह समझ में आ रहा है कि यह एक संगठित और लाभकारी व्यवसाय हो सकता है। इसके माध्यम से न केवल उनके परिवार की स्थिति में सुधार हो रहा है, बल्कि वे अपने परिवारों के लिए स्थिर और सशक्त आजीविका का स्रोत भी बना रही हैं।

सागर जिले में महिला समूहों को बकरीपालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की यह पहल एक सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बकरीपालन को एक लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका सशक्त हो रही है। यह कार्यक्रम समाज में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है और महिलाओं के आर्थिक उत्थान में मददगार साबित हो रहा है।

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