सागर, 5 मार्च 2025: आज, 5 मार्च से संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने चंडीगढ़ के सेक्टर 34 में अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया है। किसान MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी सहित 13 अन्य मांगों को लेकर यह प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक चंडीगढ़ प्रशासन ने किसानों को धरने की अनुमति नहीं दी है, जिसके कारण पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने चंडीगढ़ के पंजाब से सटे बॉर्डर सील कर दिए हैं और शहर में घुसने की कोशिश कर रहे लोगों के आईडी प्रूफ चेक किए जा रहे हैं।

पुलिस ने कड़ा नियंत्रण किया, किसानों को हिरासत में लिया
चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा को देखते हुए पहले ही पंजाब के विभिन्न बॉर्डर सील कर दिए हैं। किसानों के ट्रैक्टर ट्रॉलियों के जरिए शहर में घुसने के प्रयास को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। पुलिस ने मोहाली के रोपड़ जिले से आए 100 किसानों को हिरासत में लिया और उनकी 15 ट्रैक्टर ट्रॉलियां भी कब्जे में ले ली हैं। इन ट्रैक्टरों की नंबर प्लेट्स को रंग दिया गया था ताकि सीसीटीवी कैमरों से उनकी पहचान न हो सके। पुलिस ने इसकी जांच की और ट्रैक्टरों की पहचान के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।
किसानों की अपील: विरोध शांतिपूर्ण रहेगा
भारतीय किसान यूनियन (एकता-उगराहां) के अध्यक्ष, जोगिंदर सिंह उगराहां ने आंदोलनकारी किसानों से अपील की है कि वे पुलिस द्वारा रोके जाने पर सड़क किनारे खाली स्थान पर बैठ जाएं और किसी प्रकार की हिंसा या जाम न करें। उगराहां ने यह भी कहा कि पंजाब पुलिस किसानों को बदनाम करने के लिए जानबूझकर सड़क जाम करने का आरोप लगा सकती है, और यह पूरी तरह से एक साजिश हो सकती है। उनका कहना था कि किसान शांतिपूर्वक अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।

हथियारों से लैस 3 युवकों की गिरफ्तारी
धरने से पहले चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की। नाके पर कार सवार तीन युवकों को हिरासत में लिया गया। इनके पास से हथियार बरामद किए गए, जो लाइसेंस के बिना थे। पूछताछ में तीनों युवकों ने खुद को बिल्डर के सुरक्षाकर्मी बताया, लेकिन हथियारों से जुड़े लाइसेंस नहीं दिखा पाए। पुलिस ने उनसे कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है। इस घटना से सुरक्षा की स्थिति और भी गंभीर हो गई है और पुलिस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि प्रदर्शन शांतिपूर्वक ही चले।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
- किसानों का प्रदर्शन
किसान संगठन MSP की कानूनी गारंटी सहित पंजाब सरकार से संबंधित कई अन्य मुद्दों को लेकर चंडीगढ़ में अनिश्चितकालीन धरने का आयोजन कर रहे हैं। 26 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 5 मार्च से चंडीगढ़ में धरना शुरू किया जाएगा। किसानों का कहना है कि उनकी मुख्य मांगों में MSP की गारंटी और केंद्र सरकार से संबंधित फैसलों की त्वरित कार्रवाई शामिल है। - पंजाब CM से बहस और मीटिंग का विफल होना
हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और किसानों के बीच मीटिंग हुई, जिसमें उनकी प्रमुख मांगों और प्रोटेस्ट के तरीकों को लेकर बहस हुई। CM भगवंत मान ने बैठक के दौरान किसानों से पूछा कि 5 मार्च को होने वाले मोर्चे का क्या होगा, तो किसानों ने कहा कि उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। इस पर CM ने बैठक को बीच में छोड़ दिया। उन्होंने मीडिया से कहा कि किसान धरने के डर से मीटिंग बुला रहे थे, जो सही नहीं है। - किसान नेताओं की गिरफ्तारी
मीटिंग के बाद 4 मार्च को पंजाब पुलिस ने कई किसान नेताओं, जिनमें बलबीर राजेवाल भी शामिल हैं, को हिरासत में लिया या उनके घरों में नजरबंद कर दिया ताकि वे चंडीगढ़ न पहुंच सकें। इसके बावजूद किसानों ने धरने के अपने फैसले को टालने से इनकार कर दिया और प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया।

किसान आंदोलन ने एक बार फिर पंजाब और चंडीगढ़ में गंभीर स्थिति उत्पन्न कर दी है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन किसान संगठन अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की अडिग प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। चंडीगढ़ में किसानों के धरने की शुरुआत और पुलिस की कार्रवाई से यह मामला और भी पेचीदा हो गया है, और अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस स्थिति से किस तरह निपटेगा। किसानों की यह लम्बी लड़ाई उनके अधिकारों को लेकर और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर चल रही है, जो आने वाले दिनों में और भी व्यापक हो सकती है।