भोपाल। नर्मदा नदी में गंदा पानी और डेरी उद्योगों से जल मिलने की समस्या को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्य सरकार को अहम निर्देश जारी किए हैं। एनजीटी ने कहा है कि तीन माह के भीतर सरकार यह स्पष्ट करे कि नदी में प्रदूषण रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं।
एनजीटी ने निर्देश दिए हैं कि नर्मदा किनारे स्थित सभी डेरी उद्योगों को हटाया जाए और नदी के शुद्धिकरण के उपाय किए जाएं। इस मामले की अगली सुनवाई रिपोर्ट मिलने के बाद होगी।
यह आदेश नागरिक उपभोक्ता मंच के संरक्षक डॉ. पीजी नाजपांडे द्वारा दायर याचिका के आधार पर आया है। याचिका में नर्मदा नदी में लगातार हो रहे प्रदूषण का जिक्र किया गया था।
एनजीटी की भोपाल बेंच ने कहा कि नर्मदा के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन किया जाए और प्रतिबंधित क्षेत्र से सभी स्थाई निर्माण हटाए जाएं। साथ ही नदी के 100 मीटर के दायरे में प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया गया है कि कलेक्टर्स के माध्यम से नर्मदा, परियट और गौर नदियों के किनारे स्थित डेरी उद्योगों को दूर शिफ्ट करवाया जाए, ताकि डेरी का प्रदूषण सीधे नदी में न पहुंचे।
सुनवाई में यह भी सामने आया कि जबलपुर में स्थापित 16 सीवर ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) में से केवल 12 ही काम कर रहे हैं, जबकि गौरीघाट, ललपुर, रानीताल और गुलौआ तालाब में लगे 4 एसटीपी बंद हैं। एनजीटी ने कहा कि यह स्थिति नर्मदा के शुद्धिकरण में बाधक है और तीन माह के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
डॉ. पीजी नाजपांडे ने बताया कि एनजीटी ने कहा कि बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन कर वहां सभी स्थाई निर्माण तुरंत हटाए जाएं। परियट, गौर और नर्मदा नदी के किनारे स्थित डेरी उद्योगों को हटाना अनिवार्य है।
एनजीटी ने 100 मीटर के भीतर प्लास्टिक बैन करने का भी आदेश दिया। वर्तमान स्थिति में नदी का शुद्धिकरण अधूरा है और सुधार की आवश्यकता तत्काल है।
इस आदेश से स्पष्ट संदेश गया है कि नर्मदा में प्रदूषण रोकना और नदी का पर्यावरण संतुलन बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।