दतिया स्थित श्री पीतांबरा पीठ परिसर के प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में प्रशासन द्वारा लागू की गई नई व्यवस्थाओं को लेकर विवाद सामने आया है। मंदिर परिसर में बैठने पर लगाए गए प्रतिबंध और पटवारियों की ड्यूटी लगाकर कराई जा रही वीडियोग्राफी से नाराज कुछ लोग सोमवार को कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े से मिलने पहुंचे। उन्होंने अपनी आपत्तियां रखते हुए इन व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार करने की मांग की।
बैठने पर रोक और वीडियोग्राफी के आदेश
दरअसल हाल ही में दतिया एसडीएम संतोष तिवारी ने आदेश जारी कर मंदिर के गर्भगृह और उसके आसपास बैठने वाले लोगों पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन का कहना है कि मंदिर में बाहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। भीड़ के कारण कई बार उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है, इसलिए यह व्यवस्था लागू की गई है।
इसके साथ ही मंदिर परिसर में निगरानी के लिए पटवारियों की ड्यूटी लगाकर वहां की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

‘दलालों से सावधान’ पोस्टर हटाने की मांग
कलेक्टर से मिलने पहुंचे लोगों ने चर्चा के दौरान मंदिर परिसर में लगे “दलालों से सावधान” लिखे होर्डिंग को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि ऐसे पोस्टर मंदिर की छवि को प्रभावित करते हैं, इसलिए इन्हें हटाया जाना चाहिए।
कलेक्टर ने दिया स्पष्ट संदेश
करीब एक घंटे तक चली बैठक में कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी की धार्मिक गतिविधियों में बाधा डालना नहीं है। उनका मकसद केवल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर और व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
कलेक्टर ने इशारों में यह भी कहा कि यदि मंदिर परिसर में “दलालों से सावधान” जैसे पोस्टर लगाए गए हैं, तो निश्चित ही इसके पीछे कोई कारण रहा होगा।
उन्होंने संबंधित लोगों को सलाह दी कि भीड़भाड़ वाले दिनों में मंदिर के अंदर बैठकर जप या अन्य गतिविधियां न करें, ताकि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित न हो और मंदिर परिसर में व्यवस्था बनी रहे।
व्यवस्था सुधारने पर जोर
प्रशासन का कहना है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। यदि आवश्यक हुआ तो स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन से चर्चा कर व्यवस्थाओं में सुधार भी किया जा सकता है।