जिले में प्रारंभिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बच्चों को विद्यालयीन जीवन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मंगलवार को आंगनवाड़ी केंद्रों में “विद्यारंभ कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आंगनवाड़ी शिक्षा पूर्ण कर विद्यालय में प्रवेश लेने जा रहे बच्चों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम कलेक्टर संदीप जी आर के निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी भरतसिंह राजपूत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के अंतर्गत सागर शहरी क्रमांक 01 क्षेत्र के तिलकगंज वार्ड स्थित आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 68, 69, 70, 71, 72 एवं 73 में विशेष आयोजन किए गए। इन केंद्रों पर 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए उत्सव जैसा माहौल बनाया गया, जहां उन्हें आंगनवाड़ी से विद्यालय की ओर बढ़ने के इस महत्वपूर्ण चरण पर सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान आंगनवाड़ी शिक्षा पूर्ण कर चुके बच्चों को “विद्यारंभ एवं विदाई प्रमाण-पत्र” प्रदान किए गए। यह प्रमाण-पत्र न केवल उनके प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने का प्रतीक था, बल्कि उन्हें आगे की शैक्षणिक यात्रा के लिए प्रेरित करने का माध्यम भी बना। बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था, वहीं अभिभावकों में भी अपने बच्चों की इस उपलब्धि को लेकर गर्व का भाव दिखाई दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बच्चों को विद्यालय में नियमित रूप से प्रवेश लेने और शिक्षा के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण साधन है और इसकी शुरुआत जितनी मजबूत होगी, भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा।
इस अवसर पर पर्यवेक्षक सारिका प्रजापति ने अपने संबोधन में कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के सर्वांगीण विकास की नींव रखते हैं। यहां बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, स्वच्छता और सामाजिक व्यवहार की भी शिक्षा दी जाती है, जो उन्हें आगे के जीवन में सफलता प्राप्त करने में सहायक होती है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अंजना काछी, अख्तर बी, रेखा चंढार, अनीता पटेल, ममता एवं परवीन ने बच्चों को स्नेहपूर्वक विदाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उनकी शिक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम में सहायिकाएं खुशबू चंढार, सविता सेन, मालती पटेल, आशा पटेल, सुनीता राय एवं सरस्वती की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किया।
इस दौरान बच्चों के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों और मनोरंजक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी उत्साहपूर्ण बन गया। बच्चों ने गीत, कविताएं और छोटी-छोटी प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें शिक्षा के प्रति आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों को सराहनीय बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि “विद्यारंभ कार्यक्रम” जैसे आयोजन बच्चों के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होते हैं। यह उन्हें एक नए वातावरण में प्रवेश के लिए मानसिक रूप से तैयार करते हैं और शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हैं।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि प्रारंभिक शिक्षा का महत्व अत्यंत अधिक है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को मजबूत आधार प्रदान किया जाता है, जिस पर उनका संपूर्ण शैक्षणिक जीवन आधारित होता है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें एक बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाना है। विभाग द्वारा निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़े और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को शुभकामनाएं दी गईं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे बच्चों की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने देंगे और उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे।
कुल मिलाकर, सागर जिले में आयोजित यह विद्यारंभ कार्यक्रम न केवल एक औपचारिक आयोजन रहा, बल्कि यह बच्चों के जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक बनकर उभरा। इसने बच्चों, अभिभावकों और समाज को शिक्षा के महत्व का संदेश दिया और एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की।