‘नन्हे हाथों में किताब’: सारिका घारू का प्रवेशोत्सव अभियान, हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने का संकल्प !

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मध्य प्रदेश के सागर जिले में नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 के आगमन के साथ शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। राष्ट्रपति एवं राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित नवाचारी विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने अपने अनूठे और रचनात्मक अंदाज में ‘प्रवेशोत्सव’ के लिए बच्चों और अभिभावकों को आमंत्रित किया है।

गीत के माध्यम से शिक्षा का संदेश

सारिका घारू ने “नन्हे-नन्हे हाथों में किताब लेकर स्कूल चलें हम” जैसे प्रेरणादायक गीत के माध्यम से शिक्षा का संदेश दिया है। यह गीत केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक सामाजिक जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाना है।

उनका यह प्रयास डिजिटल माध्यमों के जरिए भी लोगों तक पहुंच रहा है, जिससे यह संदेश व्यापक स्तर पर फैल रहा है। इस तरह संगीत और तकनीक का संयोजन शिक्षा के प्रचार-प्रसार में एक प्रभावी साधन बन रहा है।

प्रवेशोत्सव: शिक्षा का उत्सव

1 अप्रैल से शुरू हो रहे प्रवेशोत्सव को इस बार एक विशेष अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य है—शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना। सारिका घारू ने इसे केवल एक सरकारी कार्यक्रम न मानकर एक उत्सव का रूप देने की कोशिश की है, ताकि बच्चों और अभिभावकों में स्कूल के प्रति सकारात्मक भावना विकसित हो।

उन्होंने कहा कि जब शिक्षा को उत्सव के रूप में मनाया जाएगा, तब समाज के हर वर्ग में इसकी अहमियत और भी अधिक समझ में आएगी।

अभिभावकों से विशेष अपील

इस अभियान के तहत अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे अपने बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में कराएं। सारिका घारू का मानना है कि सरकारी स्कूलों में भी अब बेहतर सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध हैं, जो बच्चों के उज्जवल भविष्य की नींव रख सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की शिक्षा केवल उनका अधिकार ही नहीं, बल्कि समाज और देश के विकास की आधारशिला भी है।

हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का संकल्प

इस पहल का मुख्य उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में आज भी कई बच्चे स्कूल से दूर हैं। ऐसे में इस तरह के जागरूकता अभियान उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सारिका घारू का यह प्रयास न केवल बच्चों को प्रेरित करता है, बल्कि समाज को भी यह संदेश देता है कि शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है।

नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी

सारिका घारू का यह अभियान उनके नवाचारी दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने पारंपरिक तरीकों से हटकर गीत और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर एक नई पहल की है। इससे यह साबित होता है कि यदि सही तरीके से प्रयास किया जाए, तो शिक्षा के प्रति जागरूकता को प्रभावी ढंग से बढ़ाया जा सकता है।

समाज में सकारात्मक प्रभाव

इस पहल का समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे इस गीत से प्रेरित होकर स्कूल जाने के लिए उत्साहित हो रहे हैं, वहीं अभिभावक भी अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर इस अभियान को सराहना मिल रही है और इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है।

सागर जिले में सारिका घारू द्वारा शुरू किया गया यह प्रवेशोत्सव अभियान शिक्षा के महत्व को नए और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करता है। “नन्हे हाथों में किताब” का यह संदेश केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लिए हुए है।

यदि इस तरह के प्रयास निरंतर जारी रहे, तो निश्चित रूप से वह दिन दूर नहीं जब हर बच्चा स्कूल जाएगा और देश का भविष्य मजबूत और उज्जवल बनेगा।

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