रहली नगर के वार्ड क्रमांक 14 पटनागंज में एक व्यक्ति द्वारा बीमारी से परेशान होकर फांसी लगाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और स्तब्धता का माहौल है। मृतक की पहचान 42 वर्षीय गोपी पटेल, पिता स्वर्गीय पूरन पटेल के रूप में हुई है, जो लंबे समय से पेट दर्द की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोपी पटेल बीते कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। परिजनों ने उनका विभिन्न स्थानों पर इलाज भी कराया, लेकिन उन्हें कोई खास राहत नहीं मिल पा रही थी। लगातार स्वास्थ्य खराब रहने और दर्द से परेशान रहने के कारण वे मानसिक रूप से भी काफी तनाव में रहने लगे थे। परिजनों का कहना है कि बीमारी के कारण उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो गया था और वे अक्सर चिंता में डूबे रहते थे।
घटना 31 मार्च की शाम की बताई जा रही है। उस दिन गोपी पटेल घर से यह कहकर निकले थे कि वे थोड़ी देर टहलने जा रहे हैं। लेकिन देर रात तक जब वे घर वापस नहीं लौटे, तो परिजनों को चिंता होने लगी। इसके बाद परिवार के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की और आसपास के इलाकों में खोजबीन की।

रात में खोज के दौरान परिजनों को महावीर वार्ड क्षेत्र में कमलेश बंसल के घर के पीछे नदी किनारे एक बबूल के पेड़ पर उनका शव फंदे से लटका हुआ मिला। यह दृश्य देखकर परिजन स्तब्ध रह गए और तत्काल उन्हें नीचे उतारा गया। इसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रहली ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है तथा मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।
परिजनों ने पुलिस को बताया कि गोपी पटेल किसी प्रकार के पारिवारिक विवाद में नहीं थे और उनका स्वभाव सामान्य था। हालांकि, लंबे समय से चली आ रही बीमारी और उससे उत्पन्न शारीरिक व मानसिक परेशानी के कारण वे काफी परेशान रहने लगे थे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बीमारी से तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाया।
इस घटना के बाद पूरे मोहल्ले में शोक का माहौल है। पड़ोसियों और परिचितों ने बताया कि गोपी पटेल मिलनसार व्यक्ति थे और किसी से उनका कोई विवाद नहीं था। उनकी अचानक मृत्यु से सभी लोग दुखी हैं और परिवार को सांत्वना दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाली बीमारियां न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को प्रभावित करती हैं। ऐसे में मरीज को समय पर चिकित्सा के साथ-साथ भावनात्मक और मानसिक सहयोग मिलना भी बेहद जरूरी होता है। परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों का मनोबल बनाए रखें और उन्हें अकेलापन महसूस न होने दें।
पुलिस द्वारा मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों को एकत्रित किया जा रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को केवल दवाइयों की ही नहीं, बल्कि सहानुभूति, समझ और मानसिक सहयोग की भी आवश्यकता होती है। समय रहते उचित ध्यान और सहयोग मिलने से कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है।
परिजन इस घटना से गहरे सदमे में हैं और उन्हें अभी भी विश्वास नहीं हो पा रहा है कि उनके परिवार का एक सदस्य इस तरह उन्हें छोड़कर चला गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की परेशानी या तनाव की स्थिति में अपने परिजनों और विशेषज्ञों से सलाह लें, ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।