मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी !

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मध्यप्रदेश में इस वर्ष गेहूं उपार्जन को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया है। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख 60 हजार अधिक है, जो किसानों के बढ़ते विश्वास और सरकार की नीतियों की सफलता को दर्शाती है।

मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष किसानों को 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा। इस निर्णय से किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष किसानों का पंजीकृत रकबा 41.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.65 लाख हेक्टेयर अधिक है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में गेहूं उत्पादन का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अधिक किसान सरकारी उपार्जन प्रक्रिया से जुड़ रहे हैं।

चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा उपार्जन

मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि किसानों को उपार्जन केंद्रों पर लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में 10 अप्रैल 2026 से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू की जाएगी, जबकि अन्य सभी संभागों में यह प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगी।

राजस्व विभाग द्वारा किसानों के पंजीकृत रकबे का सत्यापन तेजी से किया जा रहा है। सत्यापन पूर्ण होते ही स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे किसान अपनी सुविधा के अनुसार समय निर्धारित कर उपार्जन केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे। इससे अव्यवस्था और भीड़भाड़ की स्थिति से बचाव होगा।

उपार्जन लक्ष्य और वैश्विक चुनौतियां

मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारी कर रही है।

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका थी, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से इनकी नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इससे आम जनता और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

बारदाने की समस्या का समाधान

मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उपार्जन के दौरान बारदाने की संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए पहले से ही उपाय किए गए हैं। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन किया है। इसके अलावा HDP/PP बैग और एक बार उपयोग होने वाले जूट बारदाने के उपयोग की अनुमति भी दी गई है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्य के साथ समन्वय बनाए हुए है और बारदाने सहित अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रही है। उपार्जन शुरू होने से पहले सभी आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी।

भंडारण क्षमता में भी बड़ी तैयारी

प्रदेश में भंडारण क्षमता को लेकर भी सरकार ने व्यापक प्रबंध किए हैं। जिन जिलों में गोदामों की क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत 120 प्रतिशत तक भंडारण की अनुमति दी गई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मार्च-अप्रैल और मई-जून 2026 का खाद्यान्न एक साथ वितरित किया जाएगा, जिससे लगभग 10 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता उपलब्ध हो सकेगी।

मंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश देश में सबसे अधिक लगभग 400 लाख मीट्रिक टन की कवर्ड भंडारण क्षमता वाला राज्य है। वर्तमान में लगभग 103 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता खाली है, जो इस वर्ष के गेहूं उपार्जन लक्ष्य से भी अधिक है। इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार के पास उपार्जन के बाद गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है।

किसान हित में प्रतिबद्ध सरकार

अंत में मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसान हितैषी सरकार के रूप में कार्य कर रही है और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष का गेहूं उपार्जन अभियान सफलतापूर्वक पूरा होगा और किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

इस तरह प्रदेश सरकार की योजनाबद्ध तैयारी, संसाधनों की उपलब्धता और किसानों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने की पहल से इस वर्ष गेहूं उपार्जन का अभियान पिछले वर्षों की तुलना में अधिक प्रभावी और सफल होने की उम्मीद है।

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