सागर संभाग में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक गुणवत्ता और परीक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से लगातार निरीक्षण किए जा रहे हैं। इसी क्रम में क्षेत्रीय कार्यालय सागर संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. नीरज दुबे ने ओएसडी डॉ. भावना यादव एवं डॉ. रामकुमार गोस्वामी के साथ शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, अग्रणी का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और विश्वविद्यालय परीक्षाओं के संचालन का विस्तृत जायजा लिया गया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. इमराना सिद्दीकी एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. जयकुमार सोनी सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
उपस्थिति रजिस्टर में मिली खामियां
निरीक्षण की शुरुआत शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारियों के उपस्थिति रजिस्टर की जांच से की गई। इस दौरान कुछ कर्मचारियों के हस्ताक्षर अनुपस्थित पाए गए, जिस पर अतिरिक्त संचालक डॉ. दुबे ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

कक्षाओं और विभागों का किया निरीक्षण
निरीक्षण दल ने महाविद्यालय के विभिन्न भवनों एवं विभागों का भ्रमण कर कक्षाओं में चल रही अध्ययन-अध्यापन गतिविधियों का अवलोकन किया। प्राध्यापकों से सीधे संवाद कर पाठ्यक्रम की प्रगति और कक्षाओं के संचालन की जानकारी प्राप्त की गई।
शिक्षकों की डेली डायरी और उपस्थिति पंजी का भी परीक्षण किया गया। कुछ विभागों में कमियां पाए जाने पर अतिरिक्त संचालक ने असंतोष जताया और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
परीक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान
महाविद्यालय में संचालित विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षाओं के मद्देनजर बैठक व्यवस्था, फर्नीचर, प्रकाश व्यवस्था और पंखों की स्थिति का भी निरीक्षण किया गया। परीक्षा समन्वयक डॉ. विनय मिश्रा एवं डॉ. अमर कुमार जैन से परीक्षा संचालन से संबंधित जानकारी प्राप्त की गई।
डॉ. दुबे ने निर्देश दिए कि परीक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नकल और अनुचित साधनों पर सख्ती से नियंत्रण रखा जाए। साथ ही परीक्षार्थियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे बिना किसी बाधा के परीक्षा दे सकें।

समीक्षा बैठक में दिए सख्त निर्देश
निरीक्षण के बाद प्राचार्य कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. नीरज दुबे ने महाविद्यालय प्रशासन को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार कक्षाओं का संचालन किया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि निर्धारित पाठ्यक्रम समय पर पूर्ण किया जाए और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। परीक्षा कार्य में गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया।
गुणवत्ता सुधार पर जोर
डॉ. दुबे ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार के लिए नियमित निरीक्षण आवश्यक है। इससे न केवल व्यवस्थाओं में सुधार होता है, बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण भी मिलता है।

महाविद्यालय प्रशासन ने आश्वासन दिया कि निरीक्षण के दौरान बताई गई सभी कमियों को शीघ्र दूर किया जाएगा और भविष्य में सभी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।
इस औचक निरीक्षण के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि उच्च शिक्षा विभाग शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।