पुनीत कार्य: कामता प्रसाद के निधन के बाद परिजनों ने किया नेत्रदान, दो जिंदगियों में जगाई रोशनी !

Spread the love

मानवता और परोपकार की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है, जहां दमोह जिले के मडियादेवी सिंह पटेरा निवासी 45 वर्षीय स्वर्गीय कामता प्रसाद दहावत के परिजनों ने उनके निधन के पश्चात नेत्रदान कर दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लाने का सराहनीय निर्णय लिया। इस पुनीत कार्य ने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है कि मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में उजाला किया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार, कामता प्रसाद दहावत का लंबे समय से बीमारी के चलते 4 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे जिला चिकित्सालय दमोह में निधन हो गया। जीवनकाल में उन्होंने नेत्रदान करने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसे उनके परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा मानकर पूरा किया।

दुख की इस घड़ी में भी उनकी पत्नी गुड्डी, भाई मनोज और परिवार के अन्य सदस्यों ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तुरंत नेत्रदान की प्रक्रिया शुरू कराने का निर्णय लिया। उन्होंने जिला चिकित्सालय के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश से संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की।

👁️ आई बैंक टीम की त्वरित पहल

डॉ. राकेश की सूचना मिलते ही बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय सागर की आई बैंक टीम सक्रिय हो गई। Bundelkhand Medical College से जुड़ी नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अंजलि वीरानी पटेल ने आई बैंक प्रभारी डॉ. सारिका चौहान के मार्गदर्शन में तत्काल टीम को दमोह के लिए रवाना किया।

परिजनों की लिखित सहमति प्राप्त होने के बाद मेडिकल टीम ने पूरी सावधानी और चिकित्सकीय मानकों का पालन करते हुए कॉर्निया सुरक्षित रूप से निकाला। इसके बाद उसे सागर स्थित आई बैंक में संरक्षित किया गया, जिससे भविष्य में जरूरतमंद मरीजों को नेत्र प्रत्यारोपण के माध्यम से दृष्टि प्रदान की जा सकेगी।

🙏 मेडिकल कॉलेज ने जताया आभार

बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पी. एस. ठाकुर ने इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि नेत्रदान एक महादान है, जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद पूरी तरह स्वैच्छिक रूप से किया जाता है। उन्होंने बताया कि मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होता है, तभी कॉर्निया सुरक्षित रूप से उपयोग में लाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बीएमसी सागर में अब नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध है, जिससे दृष्टिहीन लोगों को नई रोशनी मिल सकती है।

मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने दिवंगत के पुत्रों पंकज और दीपक, पत्नी गुड्डी और भाई मनोज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायक है।

👨‍⚕️ टीमवर्क से संभव हुआ पुनीत कार्य

इस पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न करने में मेडिकल टीम की अहम भूमिका रही। टीम में डॉ. पुरवा, डॉ. रक्षित, डॉ. डालमिया, डॉ. इतिशा सहित नर्सिंग स्टाफ ओमप्रकाश कुमावत, चेतना शुक्ला और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारी शामिल थे। सभी ने समन्वय और तत्परता के साथ कार्य करते हुए समय पर प्रक्रिया पूरी की।


🌟 समाज के लिए संदेश

कामता प्रसाद दहावत के परिजनों द्वारा किया गया यह नेत्रदान न केवल दो व्यक्तियों के जीवन में प्रकाश लाएगा, बल्कि समाज को भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि अंगदान और नेत्रदान जैसे कार्य मानवता की सर्वोच्च सेवा हैं।

यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम भी अपने जीवन के बाद किसी के जीवन में उजाला बन सकते हैं। नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना आज की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस महादान के लिए प्रेरित हो सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *