भ्रामक जानकारी देने पर जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री निलंबित !

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सागर संभाग में प्रशासनिक सख्ती का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां भ्रामक जानकारी देने पर जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री हेमन्त गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सागर संभाग के कमिश्नर अनिल सुचारी द्वारा की गई है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप की स्थिति बन गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला निवाड़ी जिले के ग्राम पंचायत लहरगुंवा, जनपद पंचायत पृथ्वीपुर से जुड़ा हुआ है। 6 अप्रैल 2026 को आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान, जिसमें मध्यप्रदेश शासन के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री भी उपस्थित थे, सभी विभागों की प्रगति की समीक्षा की जा रही थी। इसी बैठक में प्रभारी कार्यपालन यंत्री हेमन्त गुप्ता द्वारा यह जानकारी प्रस्तुत की गई कि ग्राम लहरगुंवा में लगभग एक किलोमीटर लंबी नहर की सफाई का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

हालांकि, बैठक के बाद जब संबंधित कार्य का स्थल निरीक्षण किया गया, तो स्थिति पूरी तरह भिन्न पाई गई। निरीक्षण के दौरान मौके पर न तो नहर की कोई सफाई कार्य हुआ मिला और न ही नहर में पानी छोड़े जाने के कोई संकेत दिखाई दिए। इस दौरान मौजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी स्पष्ट रूप से बताया कि नहर की सफाई का कार्य नहीं हुआ है और लंबे समय से उसमें पानी भी नहीं छोड़ा गया है।

स्थिति स्पष्ट होने पर जब प्रभारी कार्यपालन यंत्री हेमन्त गुप्ता से इस संबंध में जवाब मांगा गया, तो उन्होंने संतोषजनक उत्तर देने के बजाय बार-बार भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की। इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर निवाड़ी के माध्यम से कमिश्नर सागर संभाग को भेजी गई।

कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव और उपलब्ध तथ्यों के गहन परीक्षण के बाद यह पाया गया कि हेमन्त गुप्ता प्रथम दृष्टया दोषी हैं। उनके द्वारा किया गया यह कृत्य न केवल उनके पदीय दायित्वों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यह स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता का भी स्पष्ट उदाहरण है।

इस गंभीर मामले को देखते हुए कमिश्नर अनिल सुचारी ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 09 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए हेमन्त गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि उनका यह आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन है।

इस कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट रूप से गया है कि प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, गलत जानकारी या जनता को गुमराह करने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।

स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर लोगों में संतोष देखा जा रहा है, वहीं विभागीय अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या विभागीय जांच होती है और क्या अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की जाती है।

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