सागर जिले में आगामी गेहूं उपार्जन को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय और सतर्क नजर आ रहा है। किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और उपार्जन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित हो, इसके लिए कलेक्टर संदीप जी आर ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि सभी उपार्जन केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों और प्रत्येक केंद्र का भौतिक सत्यापन संबंधित एसडीएम स्वयं करें।
यह निर्देश जिला उपार्जन समिति की बैठक के दौरान दिए गए, जिसमें अपर कलेक्टर अविनाश रावत, जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में उपार्जन कार्य की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई और अधिकारियों को जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने के निर्देश दिए गए।

किसानों की सुविधा सर्वोपरि
कलेक्टर संदीप जी आर ने कहा कि किसानों की सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी उपार्जन केंद्रों पर शुद्ध पेयजल, छायादार बैठने की व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा किट, शौचालय, तौल कांटा, इंटरनेट सुविधा और पर्याप्त बारदाना उपलब्ध होना चाहिए। गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए इन व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी केंद्र पर मूलभूत सुविधाओं में कमी पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की मंशा है कि किसानों को उनकी उपज बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और पूरी प्रक्रिया सुगम बनी रहे।

एसडीएम करेंगे भौतिक सत्यापन
कलेक्टर ने जिले के सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के उपार्जन केंद्रों का स्वयं दौरा कर भौतिक सत्यापन करें। इस दौरान केंद्रों की क्षमता, बारदाने की उपलब्धता, तौल कांटों की शुद्धता और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी केवल कागजों पर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर व्यवस्थाओं को परखें और यह सुनिश्चित करें कि उपार्जन कार्य पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संचालित हो रहा है।
मॉक रन से होगी तैयारी की जांच
कलेक्टर ने निर्देशित किया कि गेहूं उपार्जन शुरू होने से पहले सभी केंद्रों पर मॉक रन (पूर्व अभ्यास) किया जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी व्यवस्थाएं सही ढंग से काम कर रही हैं और वास्तविक उपार्जन के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी या व्यवस्थागत समस्या सामने न आए।
मॉक रन के माध्यम से तौल कांटा, डेटा एंट्री, परिवहन व्यवस्था और अन्य प्रक्रियाओं की भी जांच की जाएगी, ताकि समय रहते सुधार किया जा सके।
परिवहन और बारदाने पर विशेष ध्यान
कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि उपार्जन के साथ ही परिवहन व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि खरीदी गई फसल का समय पर परिवहन होना जरूरी है, ताकि केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था न हो।
इसके साथ ही बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बारदाने की आपूर्ति लगातार बनी रहे और किसी भी केंद्र पर इसकी कमी न होने पाए।

जिले में उपार्जन की स्थिति
बैठक के दौरान अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि जिले में चना और मसूर के उपार्जन का कार्य पहले से जारी है। चना के लिए 27,793 और मसूर के लिए 42,063 किसानों ने पंजीयन कराया है, जिनकी उपज 70 केंद्रों पर खरीदी जा रही है।
वहीं 15 अप्रैल से 31 मई तक होने वाले गेहूं उपार्जन के लिए जिले में 77,337 किसानों ने पंजीयन कराया है। इन किसानों के लिए 176 उपार्जन केंद्र निर्धारित किए गए हैं, जहां वे अपनी उपज का विक्रय कर सकेंगे।
इसके अलावा सरसों उपार्जन के लिए भी 3,500 किसानों ने पंजीयन कराया है, जिससे स्पष्ट है कि जिले में इस बार उपार्जन का दायरा काफी बड़ा है और प्रशासन को व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। किसी भी प्रकार की अनियमितता या शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों का विश्वास बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
तकनीकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश
बैठक में तकनीकी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया। इंटरनेट कनेक्टिविटी, डेटा एंट्री सिस्टम और ऑनलाइन प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए गए, ताकि उपार्जन प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।
सागर जिले में गेहूं उपार्जन को लेकर प्रशासन पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है। कलेक्टर संदीप जी आर के सख्त निर्देशों से यह स्पष्ट है कि इस बार उपार्जन प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।
एसडीएम द्वारा भौतिक सत्यापन, मॉक रन, मूलभूत सुविधाओं की अनिवार्यता और तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत करने जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि प्रशासन किसानों के हितों को लेकर गंभीर है। यदि इन निर्देशों का सही तरीके से पालन होता है, तो निश्चित रूप से किसानों को बेहतर सुविधा मिलेगी और उपार्जन प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न होगी।