मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर चिंताजनक स्तर पर !

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मध्यप्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर बनी हुई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में हर एक लाख प्रसव पर 159 माताओं की मौत हो रही है, जबकि हर एक हजार जन्म पर 40 नवजात अपनी जान गंवा रहे हैं। ये आंकड़े राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और सुरक्षित प्रसव सुविधाओं के अभाव की ओर इशारा करते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन मौतों की एक बड़ी वजह यह भी है कि कई मामलों में असली कारण स्पष्ट नहीं हो पाता, जिससे सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाना मुश्किल हो जाता है।

इसी चुनौती से निपटने के लिए AIIMS Bhopal ने एक अहम पहल शुरू की है। संस्थान में अब गर्भावस्था या प्रसव के दौरान हुई महिलाओं की मौत के मामलों में क्लिनिकल ऑटोप्सी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस प्रक्रिया के जरिए वैज्ञानिक तरीके से मौत के वास्तविक कारणों की पहचान की जाएगी।

इस सुविधा की खास बात यह है कि यह पूरी तरह नि:शुल्क है और इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। यह जांच केवल परिवार की सहमति से की जाती है, जिससे परिजनों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सच्चाई जानने का अवसर मिलता है।

क्लिनिकल ऑटोप्सी, पारंपरिक मेडिको-लीगल ऑटोप्सी से अलग होती है। इसमें शरीर के आवश्यक ऊतकों और अंगों की जांच कर बीमारी या जटिलता की सटीक वजह का पता लगाया जाता है। इसके बाद डॉक्टर हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट तैयार करते हैं, जो कुछ ही दिनों में परिवार को सौंप दी जाती है।

इस प्रक्रिया से परिजनों को यह समझने में मदद मिलती है कि मौत किन कारणों से हुई और इलाज में कहीं कोई कमी तो नहीं रही। साथ ही, परिवार के सदस्य डॉक्टरों से सीधे बातचीत कर अपनी शंकाओं का समाधान भी कर सकते हैं।

इस पहल का एक बड़ा फायदा यह भी है कि सरकार को मातृ मृत्यु के मामलों का सटीक और प्रमाणिक डेटा मिलेगा। इसके आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, सुविधाओं की कमी की पहचान और इलाज की खामियों को दूर करने के लिए बेहतर रणनीति बनाई जा सकेगी।

SRS मैटरनल बुलेटिन 2020-22 के अनुसार, मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 159 है, जबकि देश का औसत 88 है। उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ का MMR 141, ओडिशा का 136 है, जबकि केरल (18) और महाराष्ट्र (36) बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के उदाहरण हैं।

क्लिनिकल ऑटोप्सी की पूरी प्रक्रिया करीब डेढ़ घंटे में पूरी होती है और इसमें मृतक के सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाता है। जांच के लिए केवल आवश्यक ऊतक ही लिए जाते हैं, बाद में सभी अंगों को सुरक्षित तरीके से शरीर में वापस रख दिया जाता है। शरीर को सिलकर परिवार को सौंपा जाता है और चेहरे को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौत के वास्तविक कारण समय रहते सामने आ जाएं, तो भविष्य में ऐसी कई घटनाओं को रोका जा सकता है। AIIMS Bhopal की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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