मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि बेटियों और बहनों के सशक्तिकरण के बिना समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में प्रदेश सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह बात सीहोर जिले के आष्टा में आयोजित महिला सशक्तिकरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर उन्होंने “लाड़ली बहना योजना” की 35वीं किस्त के रूप में प्रदेश की 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में 1836 करोड़ रुपये सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित किए। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अब तक महिलाओं को कुल 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि भारत में मातृसत्ता की परंपरा रही है और अब प्रदेश में हर माह “रक्षाबंधन” जैसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें बहनों के सम्मान और सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 12 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जबकि 65 लाख से अधिक महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आष्टा में 184 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया। इनमें आष्टा और जावर में नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण प्रमुख रूप से शामिल है। इन विद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त कक्षाएं, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, खेल मैदान और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। आष्टा का विद्यालय लगभग 61 करोड़ रुपये की लागत से 15 एकड़ में विकसित किया गया है, जबकि जावर का विद्यालय करीब 39.45 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने छात्राओं के लिए विशेष घोषणाएं करते हुए कन्या महाविद्यालय और विद्यालयों में छात्रावास निर्माण तथा नए भवनों के निर्माण की घोषणा की। साथ ही उन्होंने आष्टा में आईटीआई खोलने, जावर में शहरी सौंदर्यीकरण, नहर और बैराज निर्माण तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की भी घोषणा की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद भी किया। उन्होंने कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों से उनके करियर को लेकर चर्चा की और उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, उद्योगपति और राजनेता बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को देश के भविष्य का नेतृत्व करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार कर रही है। विद्यार्थियों को साइकिल, लैपटॉप और स्कूटी जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, ताकि वे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि सांदीपनि विद्यालयों में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी स्कूलों को छोड़कर यहां प्रवेश ले रहे हैं।
किसान कल्याण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया गया है और गेहूं की खरीद पर 40 रुपये बोनस देकर 2625 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। साथ ही किसानों को सस्ती दर पर बिजली कनेक्शन और 24 घंटे बिजली आपूर्ति की सुविधा दी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान आष्टा नगर में मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत भी किया गया। लगभग दो किलोमीटर लंबे रोड-शो में जनसैलाब उमड़ पड़ा। नागरिकों ने जगह-जगह फूल वर्षा कर उनका स्वागत किया और विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्थाओं ने भी गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इस दौरान भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
समग्र रूप से यह आयोजन न केवल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि शिक्षा, कृषि और बुनियादी विकास के क्षेत्र में सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।