एमपी बोर्ड परिणाम 2026: बेटियों का दबदबा !

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मध्यप्रदेश में इस वर्ष घोषित 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों ने शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगाई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिणाम घोषित करते हुए कहा कि उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कारण प्रदेश के विद्यार्थियों का भविष्य निरंतर उज्ज्वल हो रहा है।

इस वर्ष कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 73.42 प्रतिशत और कक्षा 12वीं का परिणाम 76.01 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। विशेष बात यह रही कि शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों को पीछे छोड़ते हुए बेहतर परिणाम हासिल किए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कक्षा 10वीं की परीक्षा में 8 लाख 97 हजार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें 73.42 प्रतिशत सफल रहे। छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहा, जहां 77.52 प्रतिशत छात्राएं उत्तीर्ण हुईं, वहीं 69.31 प्रतिशत छात्र पास हुए। हाईस्कूल की मेरिट सूची में कुल 378 विद्यार्थियों ने स्थान बनाया, जिनमें 235 छात्राएं और 143 छात्र शामिल हैं।

कक्षा 10वीं में पन्ना जिले के गुनौर की छात्रा प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे “पन्ना की धरती से निकला एक और हीरा” बताया।

वहीं कक्षा 12वीं की परीक्षा में 6 लाख 89 हजार 746 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें 76.01 प्रतिशत सफल रहे। यहां भी छात्राओं ने बाजी मारी—79.41 प्रतिशत छात्राएं उत्तीर्ण हुईं, जबकि छात्रों का प्रतिशत 72.39 रहा। मेरिट सूची में कुल 221 विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त किया, जिनमें 158 छात्राएं और 63 छात्र शामिल हैं।

हायर सेकेंड्री परीक्षा में भोपाल की छात्रा खुशी राय और चांदनी विश्वकर्मा ने 500 में से 494 अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से प्रथम स्थान हासिल किया। इस वर्ष भोपाल का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण अब इन स्कूलों के परिणाम निजी संस्थानों से बेहतर हो रहे हैं। कक्षा 10वीं में शासकीय स्कूलों का परिणाम 76.80 प्रतिशत रहा, जबकि निजी स्कूलों का 68.84 प्रतिशत। वहीं 12वीं में शासकीय स्कूलों का परिणाम 80.43 प्रतिशत और निजी स्कूलों का 69.67 प्रतिशत रहा।

जिलों के प्रदर्शन की बात करें तो हाईस्कूल में अनूपपुर जिला 93.85 प्रतिशत परिणाम के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि अलीराजपुर दूसरे स्थान पर रहा। वहीं 12वीं में झाबुआ जिला 93.23 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर रहा और अनूपपुर दूसरे स्थान पर रहा।

मुख्यमंत्री ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। साथ ही उन्होंने उन विद्यार्थियों को भी हिम्मत न हारने की सलाह दी, जो इस बार सफल नहीं हो सके। उन्होंने घोषणा की कि ऐसे विद्यार्थियों को “द्वितीय अवसर परीक्षा” के माध्यम से एक और मौका दिया जाएगा, जो 7 मई से शुरू होगी।

उन्होंने कहा कि यह परिणाम “स्वर्णिम मध्यप्रदेश” की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है, जहां ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटियों ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी परिणामों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहां असफल विद्यार्थियों को सभी विषयों में पुनः परीक्षा देने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश कुमार वैद्य सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 15 लाख 86 हजार से अधिक विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए और पहली बार सभी का परिणाम घोषित किया गया, जिसमें किसी का भी परिणाम रोका नहीं गया।

कुल मिलाकर, इस वर्ष का बोर्ड परीक्षा परिणाम प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और गुणवत्ता का प्रतीक बनकर सामने आया है, जिसमें बेटियों ने अपनी प्रतिभा से नया इतिहास रचा है।

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