मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले के नरयावली में आयोजित भव्य समारोह में प्रदेश के समग्र विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति समाज की आधारशिला है और महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना किसी भी राष्ट्र का विकास अधूरा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार, समाज और देश के विकास पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्तमान में प्रदेश में कई महिलाएं प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण का प्रमाण है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नरयावली में “सांदीपनि विद्यालय” का लोकार्पण किया, जिसे उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ये विद्यालय केवल भवन नहीं हैं, बल्कि शिक्षा के ऐसे केंद्र हैं जो विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेंगे। इससे अभिभावकों को अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के बोर्ड परीक्षा परिणामों में सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को पीछे छोड़ते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जो शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
मुख्यमंत्री ने सांदीपनि विद्यालयों को भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से जोड़ते हुए कहा कि यह शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना ही सरकार का लक्ष्य है और इसी भावना से कार्य किए जा रहे हैं।
कृषि क्षेत्र पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” घोषित किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों की उपज का एक-एक दाना सरकार खरीदेगी और गेहूं की खरीद 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी, जिसे भविष्य में और बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

बुंदेलखंड क्षेत्र की समस्याओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां जल संकट लंबे समय से चुनौती रहा है, लेकिन नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से इस क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद बुंदेलखंड का कोई भी खेत सिंचाई से वंचित नहीं रहेगा।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने बहुप्रतीक्षित कड़ान मध्यम सिंचाई परियोजना के पुनरीक्षित प्राक्कलन को मंजूरी देने की घोषणा की, जिसकी लागत लगभग 240 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर लगभग 30 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लगभग 63.41 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीति केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारना है।
उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि यदि किसी परियोजना के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की जाती है तो उन्हें बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही किसानों को मात्र 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जो सरकार की किसान हितैषी नीतियों का प्रमाण है।
समारोह में प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि पिछले वर्ष को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय सफल रहा है और अब प्रदेश में तेजी से औद्योगिक विकास हो रहा है। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

सागर की सांसद लता वानखेड़े ने भी मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश लगातार विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को ग्लोबल निवेश हब बनाने की दिशा में सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है।
विधायक प्रदीप लारिया ने कहा कि नरयावली क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिली है और दिल्ली-नागपुर कॉरिडोर के अंतर्गत भूमि आवंटन जैसे निर्णय क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।
कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रही। इस आयोजन ने न केवल क्षेत्र के विकास को नई दिशा दी, बल्कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जनता का विश्वास भी मजबूत किया।