खंभे पर काम कर रहे कर्मचारी की मौत: जबलपुर में करंट लगने के बाद गिरा, परिजनों का चक्काजाम !

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मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में एक दर्दनाक हादसे ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खजरी खिरिया क्षेत्र में बिजली लाइन सुधारने के दौरान एक ठेका कर्मचारी की खंभे से गिरने से मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।


जानकारी के अनुसार, 51 वर्षीय रंजीत कोरी बिजली लाइन में आई खराबी को सुधारने के लिए खंभे पर चढ़े थे। बताया जा रहा है कि लाइन बंद होने के बाद ही वे काम कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान अचानक बिजली चालू हो गई। करंट लगते ही उनका संतुलन बिगड़ गया और वे करीब 30 फीट ऊंचे खंभे से नीचे गिर पड़े।

साथियों ने तुरंत 108 एंबुलेंस की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


घटना में यह बात भी सामने आई है कि रंजीत बिना उचित सुरक्षा उपकरणों के खंभे पर चढ़े थे। न तो उन्होंने ग्लव्स पहने थे और न ही अन्य जरूरी सुरक्षा साधन मौजूद थे। यह लापरवाही हादसे की गंभीरता को और बढ़ाने वाली साबित हुई।

बताया गया कि उन्होंने पहले अन्य कर्मचारियों से खंभे पर चढ़ने को कहा था, लेकिन किसी ने जोखिम लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद वे खुद ही खंभे पर चढ़ गए।


मृतक के परिजनों ने सीधे तौर पर बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब लाइन बंद थी, तो अचानक चालू कैसे हो गई? बिना सूचना के बिजली सप्लाई शुरू होना गंभीर लापरवाही है।

परिजनों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए, साथ ही मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और बेटे को नौकरी दी जाए।


घटना के अगले दिन आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अमखेरा-खजरी खिरिया रोड पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे आंदोलन जारी रखेंगे।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि शुरुआत में लोग मानने को तैयार नहीं थे।


बिजली विभाग के अधिकारियों ने परिजनों को आश्वासन दिया कि मृतक के बेटे को नौकरी दी जाएगी। साथ ही विभाग की ओर से 5 लाख रुपए और बीमा कंपनी की ओर से 4 लाख रुपए का मुआवजा देने की बात कही गई।

इसके बावजूद परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।


बिजली विभाग के अधिकारियों ने घटना को लेकर अलग कारण बताया है। उनके अनुसार, खंभे पर चढ़ते समय रस्सी के झूले का हुक ठीक से नहीं फंसा था, जिसके कारण रंजीत संतुलन खो बैठे और नीचे गिर गए। गिरने से सिर में गंभीर चोट आई, जिससे उनकी मौत हो गई।

हालांकि यह बयान परिजनों के आरोपों से अलग है, जिससे मामले में जांच की जरूरत और बढ़ गई है।


पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसा करंट लगने से हुआ या तकनीकी लापरवाही से गिरने के कारण।


स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही से पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर विभाग गंभीर है या नहीं।


ठेका कर्मचारियों के साथ अक्सर यह समस्या देखी जाती है कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते। जोखिम भरे काम के बावजूद उनकी सुरक्षा की अनदेखी की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना बेहद जरूरी है।


जबलपुर में हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। एक कर्मचारी की जान चली गई, लेकिन इसके पीछे की लापरवाही और सिस्टम की खामियां उजागर हो गईं।

जरूरत है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।

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