सागर। शहर में सामाजिक और धार्मिक सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां श्री सीताराम नाम लेखन समिति द्वारा न केवल लेखन के माध्यम से आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाई जा रही है, बल्कि भीषण गर्मी में पक्षियों की सेवा का भी सराहनीय कार्य किया जा रहा है। समिति के पदाधिकारियों की बैठक सनराइज मेगा सिटी में सहव्यवस्थापक पं. बृजेश द्विवेदी के संयोजन में आयोजित की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णयों के साथ सेवा कार्यों की समीक्षा की गई।
बैठक की अध्यक्षता जगदीश प्रसाद रावत ने की। इस अवसर पर पं. बृजेश द्विवेदी ने समिति द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि करीब पांच माह पूर्व समिति ने भक्तों और लेखन प्रेमियों को निशुल्क कॉपियां वितरित करने का निर्णय लिया था। इस पहल का उद्देश्य लोगों को श्री सीताराम नाम लेखन के माध्यम से आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करना है।

उन्होंने बताया कि इस अवधि में अब तक 700 कॉपियों का वितरण किया जा चुका है, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इनमें से 575 कॉपियां पूर्ण रूप से भरकर समिति के पास जमा भी हो चुकी हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि लोगों में धार्मिक लेखन के प्रति गहरी आस्था और उत्साह है। बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़कर न केवल अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं, बल्कि समाज में भी एक अच्छा संदेश दे रहे हैं।
समिति द्वारा यह सेवा पिछले 14 वर्षों से निरंतर जारी है। हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर और भैरवधाम स्थित श्री सीताराम नाम बैंक के माध्यम से यह कार्य लंबे समय से किया जा रहा है। इन स्थानों पर भक्त नियमित रूप से आकर कॉपियां प्राप्त करते हैं और नाम लेखन का कार्य करते हैं। इस प्रकार यह पहल केवल एक धार्मिक गतिविधि ही नहीं, बल्कि समाज में अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का माध्यम भी बन गई है।
पिछले पांच महीनों से समिति ने इस सेवा को और विस्तार देते हुए प्रत्येक रविवार को सनराइज मेगा सिटी से भी कॉपियों का वितरण प्रारंभ किया है। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलने वाली इस व्यवस्था के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उन लोगों को भी सुविधा मिल रही है, जो पहले इन केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते थे।
बैठक के बाद समिति के सदस्यों ने एक और सराहनीय पहल की। बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए उन्होंने पक्षियों के लिए वृक्षों पर सकोरे (मिट्टी के छोटे बर्तन) बांधे। इन सकोरों में नियमित रूप से पानी भरने का संकल्प भी लिया गया, ताकि गर्मी में प्यास से जूझ रहे पक्षियों को राहत मिल सके। यह कार्य न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया का भी प्रतीक है।

समिति के सदस्यों ने कहा कि गर्मी के इस कठिन समय में केवल मनुष्यों ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों की भी देखभाल करना हमारा कर्तव्य है। पानी के अभाव में कई पक्षियों की जान तक चली जाती है, ऐसे में यह छोटा सा प्रयास उनके जीवन को बचाने में सहायक हो सकता है। उन्होंने शहरवासियों से भी अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करें।
बैठक में अजय खरे, अखिलेश्वर नाथ शुक्ला, मुकेश श्रीवास्तव, सुदेश भटेले, रामरतन तिवारी, मोहित उपाध्याय, नमन द्विवेदी सहित समिति के कई सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर इन सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
समग्र रूप से देखा जाए तो श्री सीताराम नाम लेखन समिति का यह प्रयास समाज के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरा है। एक ओर जहां यह पहल लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दे रही है। ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और दूसरों को भी इसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।