कोतवाली से भागा नाबालिग, पुलिस ने दौड़ाकर दबोचा: CCTV में कैद हुई घटना !

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छतरपुर में मंगलवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब सिटी कोतवाली परिसर से पूछताछ के लिए बुलाया गया एक नाबालिग युवक पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। हालांकि पुलिस की तत्परता के चलते कुछ ही दूरी पर घेराबंदी कर उसे दोबारा पकड़ लिया गया। इस पूरी घटना का वीडियो कोतवाली में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

पूछताछ के दौरान अचानक भागा युवक

जानकारी के अनुसार, 16 वर्षीय आयुष करेरे, निवासी टोरिया मोहल्ला, को एक पारिवारिक विवाद के चलते सिटी कोतवाली बुलाया गया था। उसकी मां ने शिकायत की थी कि बेटा उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज करता है।

पुलिस युवक को समझाइश देने के उद्देश्य से थाने लेकर आई थी। मामला दर्ज नहीं किया गया था और इसे पारिवारिक विवाद के रूप में सुलझाने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान मौका पाकर युवक पुलिस की निगरानी से निकलकर अचानक भाग खड़ा हुआ।

कोतवाली परिसर में मची अफरा-तफरी

युवक के भागते ही कोतवाली परिसर में हड़कंप मच गया। पुलिसकर्मी कुछ क्षण के लिए असहज हो गए, लेकिन तुरंत स्थिति को संभालते हुए उसके पीछे दौड़ पड़े।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक तेजी से भागते हुए मुख्य सड़क की ओर निकल गया। पुलिसकर्मियों ने भी उसका पीछा किया, जिससे सड़कों पर कुछ देर तक दौड़-भाग की स्थिति बनी रही। इस दृश्य को देखकर राहगीर भी हैरान रह गए।

घेराबंदी कर दोबारा किया गिरफ्तार

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आसपास के क्षेत्रों में घेराबंदी कर दी। काफी मशक्कत के बाद युवक को कड़ा की बरिया इलाके के पास पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे वापस सिटी कोतवाली लाया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवक को सुरक्षित हिरासत में लेकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

CCTV में कैद हुई पूरी घटना

यह पूरी घटना कोतवाली परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवक अचानक दौड़ लगाकर परिसर से बाहर निकलता है और पुलिसकर्मी उसके पीछे दौड़ते नजर आते हैं।

यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

कोतवाली जैसे संवेदनशील स्थान से किसी युवक का इस तरह भाग जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आमतौर पर थानों में पर्याप्त निगरानी और सुरक्षा इंतजाम होते हैं, लेकिन इस घटना ने इन व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि थानों में आने वाले व्यक्तियों पर सतत निगरानी रखना बेहद जरूरी होता है, खासकर तब जब वे किसी विवाद या जांच के सिलसिले में बुलाए गए हों।

पारिवारिक विवाद बना कारण

इस पूरे मामले की खास बात यह है कि युवक किसी गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी नहीं था, बल्कि उसे उसकी मां की शिकायत पर समझाइश देने के लिए बुलाया गया था।

मां का आरोप था कि बेटा उनके साथ मारपीट करता है और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता है। पुलिस इस मामले को बिना केस दर्ज किए आपसी समझौते के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रही थी।

पुलिस की सफाई और जांच

घटना के बाद पुलिस ने मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर किस लापरवाही के कारण युवक कोतवाली से भागने में सफल हुआ।

संभावना है कि ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों से भी इस संबंध में जवाब-तलब किया जाएगा। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त किया जा सकता है।

यह घटना भले ही कुछ ही समय में नियंत्रित कर ली गई, लेकिन इसने पुलिस व्यवस्था की एक बड़ी खामी को उजागर कर दिया है। कोतवाली जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान से किसी का भाग जाना गंभीर चिंता का विषय है।

हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए युवक को दोबारा पकड़ लिया, लेकिन इस घटना से सबक लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है। साथ ही पारिवारिक विवादों को भी समय रहते सुलझाना जरूरी है, ताकि वे इस तरह की स्थितियों तक न पहुंचें।

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