भोपाल में पुलिस पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप: टीटी नगर थाने में युवकों की पिटाई, पैरों में आलपिन चुभाने का दावा; जांच की मांग !

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टीटी नगर थाना क्षेत्र में दो युवकों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर रातभर बेरहमी से पीटा, उनके पैरों में आलपिन चुभोई और जबरन चोरी की वारदात कबूल कराने का दबाव बनाया। इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस कमिश्नर से लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने पूरे घटनाक्रम को चर्चा का विषय बना दिया है।

जानकारी के अनुसार, नालंदा बुद्ध विहार, अंबेडकर नगर निवासी आयुष गोलाईत (21) 25 अप्रैल को अपने दोस्तों के साथ कोलार क्षेत्र में एक मित्र की हल्दी समारोह में शामिल होने गया था। देर रात करीब ढाई बजे वह अपने दोस्त अतुल चोटाले के साथ वापस लौट रहा था। इसी दौरान कटसी सेकेंड स्टॉप के पास दोनों एक नल पर हाथ-मुंह धो रहे थे, तभी डायल 112 पुलिस वहां पहुंची और उन्हें हिरासत में लेकर थाने ले गई।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस दोनों युवकों को अंजली कॉम्प्लेक्स स्थित एक घर में लेकर गई, जहां कुछ समय पहले चोरी की घटना हुई थी। हालांकि, वहां के फरियादी ने दोनों को पहचानने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद पुलिस उन्हें वापस थाने ले आई और कथित तौर पर पूरी रात उनके साथ मारपीट की गई।

पीड़ितों का कहना है कि थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें लाठी-डंडों से पीटा। आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर राघवेंद्र सिकरवार सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने अतुल चोटाले के पैरों में आलपिन चुभोई, ताकि वह अपराध कबूल कर ले। इस तरह के आरोप बेहद गंभीर हैं और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं।

मारपीट के दौरान आयुष की हालत अचानक बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार, उसे खून की उल्टियां होने लगीं और उसका हाथ भी फ्रैक्चर हो गया। इसके बाद पुलिस उसे इलाज के लिए जयप्रकाश अस्पताल लेकर गई, जहां उसे भर्ती कराया गया। परिवार का आरोप है कि घटना के लगभग 12 घंटे बाद तक उन्हें न तो हिरासत की सूचना दी गई और न ही अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी गई।

आयुष की मां कंचन गोलाईत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने दोनों युवकों के मोबाइल फोन बंद कर दिए थे, जिससे वे किसी से संपर्क नहीं कर सके। उन्हें एक परिचित के जरिए बेटे के अस्पताल में होने की जानकारी मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने दोनों को छोड़ने और जमानत दिलाने के बदले 20 से 30 हजार रुपए की मांग की।

मामले में पुलिस ने दोनों युवकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। आयुष गोलाईत को एसीपी टीटी नगर कोर्ट से जमानत मिल गई है, जबकि उसके दोस्त अतुल चोटाले को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। जमानत पर रिहा होने के बाद आयुष ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें उसने पुलिस पर जबरन अपराध कबूल कराने और मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

हालांकि, पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। टीटी नगर थाने के एसआई राघवेंद्र सिंह सिकरवार का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं। उनके अनुसार, दोनों युवकों को एक कॉलोनी के गार्ड ने संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़ा था और पुलिस को सौंपा था। इसके बाद रात्री अधिकारी द्वारा पूछताछ की गई।

पुलिस का यह भी कहना है कि आयुष गोलाईत के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें आर्म्स एक्ट, मारपीट और पॉक्सो एक्ट जैसी धाराएं शामिल हैं। हालांकि, पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुराने मामलों के आधार पर किसी के साथ इस तरह का व्यवहार करना उचित नहीं है।

यह मामला अब पुलिस की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ा प्रश्न बन गया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन होगा। वहीं, यदि आरोप गलत साबित होते हैं, तो पुलिस पर झूठे आरोप लगाने का मामला भी बन सकता है।

फिलहाल, पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है और प्रशासन से उम्मीद कर रहा है कि इस मामले में सच्चाई सामने लाई जाएगी। आने वाले दिनों में जांच के परिणाम ही इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

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