मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। रविन्द्र भवन स्थित हंसध्वनि सभागार में आयोजित “कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण प्रशिक्षण एवं कार्यशाला” के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कई अहम योजनाओं की शुरुआत की। इनमें “मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड”, “सीएम किसान हेल्पलाइन” और “पैक्स सदस्यता वृद्धि अभियान” शामिल हैं।
यह पहल केवल योजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं रही, बल्कि मुख्यमंत्री ने खुद एक किसान बनकर हेल्पलाइन पर कॉल कर इसकी कार्यप्रणाली को परखा। उन्होंने गर्मी के मौसम में तीसरी फसल लेने से जुड़ा सवाल पूछा, जिस पर कॉल सेंटर से जवाब मिला कि संबंधित अधिकारी उनसे संपर्क करेंगे।

क्या है ‘सीएम किसान हेल्पलाइन’ और क्यों है खास
“सीएम किसान हेल्पलाइन” एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां किसान अपनी समस्याएं, सवाल और सुझाव सीधे सरकार तक पहुंचा सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को तत्काल समाधान उपलब्ध कराना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना है।
इस हेल्पलाइन के जरिए किसान:
- फसल से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं
- मौसम, सिंचाई और बीज संबंधी सलाह प्राप्त कर सकते हैं
- सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे लें, यह जान सकते हैं
- अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं
इस पहल से किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और उन्हें एक ही जगह से समाधान मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने खुद किया कॉल, परखी व्यवस्था
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन पर कॉल कर खुद इसकी कार्यप्रणाली का परीक्षण किया। उन्होंने एक सामान्य किसान की तरह सवाल पूछा—“गर्मी के मौसम में तीसरी फसल कैसे ली जा सकती है?”
कॉल सेंटर कर्मचारी ने जवाब देते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी उनसे संपर्क करेंगे और पूरी जानकारी देंगे। इस तरह मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि सिस्टम वास्तव में जमीन पर काम कर रहा है या नहीं।

16 विभागों को एक मंच पर लाने की पहल
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसान कल्याण से जुड़े 16 विभागों को एक मंच पर लाना एक बड़ी पहल है। इसमें कृषि, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, कृषि अभियांत्रिकी, बीज निगम और कृषि विज्ञान केंद्र जैसे विभाग शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि किसान केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़े कई अन्य क्षेत्र जैसे:
- सड़क (पीडब्ल्यूडी)
- शिक्षा
- सिंचाई
- बिजली
भी सीधे तौर पर किसान के जीवन को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन सभी विभागों को समन्वित रूप से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
कृषि और उद्यानिकी को ‘भाई-बहन’ की तरह बताया
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि और उद्यानिकी को भाई-बहन की तरह देखा जाना चाहिए। वहीं सहकारिता के अंतर्गत पशुपालन, मत्स्य पालन, नर्सरी और अन्य गतिविधियों को जोड़ा गया है।
इसका उद्देश्य यह है कि किसान केवल एक ही फसल पर निर्भर न रहे, बल्कि बहु-आयामी गतिविधियों के जरिए अपनी आय बढ़ा सके।
खेती में आ रहा बदलाव: अब गर्मी में भी फसल
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले खेती केवल खरीफ और रबी सीजन तक सीमित थी, लेकिन अब तकनीक, सिंचाई और बिजली के विस्तार के कारण गर्मी के मौसम में भी फसल ली जा रही है।
इससे किसानों के लिए आय के नए अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसान साल में तीन फसलें लेकर अपनी आय बढ़ा सके।
“दूध क्रांति” की ओर बढ़ता प्रदेश
मुख्यमंत्री ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि Maheshwar क्षेत्र के एक किसान से बातचीत में यह सामने आया कि फसल से मिलने वाली आय सीमित है, लेकिन दूध उत्पादन से उसकी आय में वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि दूध के दाम बढ़ने से किसानों को सीधा लाभ मिला है और प्रदेश में एक तरह की “दूध क्रांति” देखने को मिल रही है।
तकनीक और नवाचार पर जोर
मुख्यमंत्री ने Israel का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सीमित बारिश के बावजूद आधुनिक तकनीक के जरिए कृषि में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। हमें भी नई तकनीकों को अपनाना होगा।
उन्होंने Narendra Modi के नेतृत्व में चल रही नदी जोड़ो परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे सिंचाई के नए अवसर बन रहे हैं और किसानों को लाभ मिल रहा है।
कार्यशाला का उद्देश्य और भागीदारी
इस कार्यशाला में प्रदेशभर से 1027 से अधिक कर्मचारी शामिल हुए। इनमें जिला, ब्लॉक, क्लस्टर और ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारी शामिल थे। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी भाग लिया।
कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शामिल हैं:
- ई-विकास और उर्वरक वितरण
- प्राकृतिक खेती का संवर्धन
- कृषि कर्मयोगियों का प्रशिक्षण
- जिला कृषि प्लान
- सहकारिता और eHRMS सिस्टम
- नरवाई प्रबंधन
- उद्यानिकी और बीज उत्पादन
- मत्स्य पालन और पशुपालन
सरकार की रणनीति: किसानों की आय बढ़ाना
कृषि मंत्री Aidal Singh Kansana ने कहा कि सरकार किसानों को केंद्र में रखकर योजनाएं बना रही है। उन्होंने बताया कि हर जिले में कृषि मेले आयोजित किए जा रहे हैं और इन कार्यशालाओं के जरिए योजनाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।
‘कर्मयोगी’ भावना से काम करने पर जोर
कृषि विभाग के प्रमुख सचिव Nishant Barbade ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा लोक सेवकों को ‘कर्मयोगी’ कहा गया है। इसी भावना के साथ काम करते हुए मुख्यमंत्री ने इस वर्ष को “कृषि कल्याण वर्ष” घोषित किया है।
किसानों के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म
सरकार ने एक ऐसा साझा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जहां किसानों को मिलने वाली सभी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी। इससे न केवल प्रक्रियाएं आसान होंगी, बल्कि योजनाओं का लाभ भी तेजी से किसानों तक पहुंचेगा।
कृषि क्षेत्र में समग्र विकास की दिशा
कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया कि सरकार अब केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि:
- फल और सब्जी उत्पादन
- डेयरी
- पशुपालन
- मत्स्य पालन
- दलहन-तिलहन
सभी क्षेत्रों को एकीकृत रूप से विकसित करने पर जोर दे रही है।
“सीएम किसान हेल्पलाइन” और अन्य पहलें यह दर्शाती हैं कि सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक, तकनीकी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गंभीर है। मुख्यमंत्री द्वारा खुद कॉल कर सिस्टम की जांच करना यह संकेत देता है कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जमीन पर परिणाम भी चाहती है।
अगर ये योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू होती हैं, तो निश्चित रूप से किसानों की आय बढ़ेगी, उनकी समस्याओं का समाधान तेजी से होगा और कृषि क्षेत्र में एक नया बदलाव देखने को मिलेगा।