जबलपुर में नाबालिग की दो बार सौदेबाजी: शादी के नाम पर 1 लाख में खरीदी, 2 लाख में बेची; पूर्व सरपंच चला रहा था तस्करी गैंग !

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मध्यप्रदेश के जबलपुर में नाबालिग की दो बार सौदेबाजी: शादी के नाम पर 1 लाख में खरीदी, 2 लाख में बेची; पूर्व सरपंच चला रहा था तस्करी गैंग ! से मानव तस्करी का एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नाबालिग लड़की को शादी के नाम पर दो बार बेचा गया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क को एक पूर्व सरपंच संचालित कर रहा था, जो दलालों और सहयोगियों के जरिए लड़कियों की खरीद-फरोख्त करता था।

इस मामले में पुलिस अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और जांच के दौरान और बड़े खुलासे होने की आशंका जताई जा रही है।


कैसे शुरू हुआ पूरा मामला

घटना 6 दिसंबर 2025 की है, जब Ghamapur की रहने वाली 16 वर्षीय नाबालिग लड़की अचानक लापता हो गई। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।

करीब 16 दिन बाद, 22 दिसंबर को पुलिस ने लड़की को लगभग 483 किलोमीटर दूर Shajapur जिले के एक गांव से बरामद किया। जांच में पता चला कि उसे 2 लाख रुपए में बेचकर शादी कराई गई थी।


प्यार, विवाद और फिर तस्करी के जाल में फंसी लड़की

पुलिस जांच में सामने आया कि नाबालिग का पड़ोस में रहने वाले 20 वर्षीय युवक से प्रेम संबंध था। 6 दिसंबर को वह अपने दोस्त सुमित चौहान से मिलने निकली और दोनों घूमते हुए जबलपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे।

यहां दोनों के बीच विवाद हो गया और सुमित उसका मोबाइल लेकर भाग गया। घर लौटने से डरकर लड़की स्टेशन पर ही बैठी रही। इसी दौरान उसकी मुलाकात मनीष सपेरा नामक व्यक्ति से हुई, जिसने उसे झांसे में लेकर अपने साथ ले लिया।


मंडला से सीहोर तक, फिर सौदेबाजी

मनीष सपेरा 7 दिसंबर की रात लड़की को बस से Mandla ले गया। उसके साथ उसका भांजा अर्जुन भी था। लड़की को दो दिन तक वहां रखा गया।

इसके बाद उसे Sehore के चांदबड़ गांव ले जाया गया, जहां पूर्व सरपंच राकेश कोरबे ने उसे 1 लाख रुपए में खरीद लिया।


1 लाख में खरीदी, 2 लाख में बेची

पूर्व सरपंच राकेश कोरबे ने लड़की को आगे बेचने की योजना बनाई। उसने अपने नेटवर्क को सक्रिय किया, जिसमें पंडित और अन्य सहयोगी शामिल थे।

दलालों ने लड़की की फोटो लेकर विभिन्न जिलों में ग्राहक तलाशना शुरू किया। अंततः Guna जिले के बसद गांव निवासी आकाश मेवाड़ा से संपर्क हुआ और 2 लाख रुपए में सौदा तय हुआ।

12 दिसंबर को आकाश ने पैसे देकर लड़की को अपने गांव ले जाकर शादी कर ली। यह पूरी प्रक्रिया परिवार की मौजूदगी में कराई गई, जिससे यह एक वैध शादी जैसा दिखे।


लड़की ने ऐसे बचाई अपनी जान

शादी के बाद लड़की किसी तरह वहां रह रही थी। 19 दिसंबर को उसे मौका मिला और उसने पड़ोसी के मोबाइल से अपने नंबर पर कॉल किया, जो उसके दोस्त सुमित के पास था।

हालांकि सुमित ने उसकी मदद नहीं की, लेकिन पुलिस पहले से मोबाइल ट्रेस कर रही थी। कॉल की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने लोकेशन ट्रैक की और शाजापुर पहुंचकर लड़की को बरामद कर लिया।


पुलिस जांच और गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच महिला थाना को सौंपी गई। Sampat Upadhyay के निर्देश पर Ashish Jain के नेतृत्व में टीम गठित की गई।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें शामिल हैं:

  • मनीष सपेरा
  • अर्जुन
  • सुमित चौहान
  • राकेश कोरबे (पूर्व सरपंच)
  • आकाश मेवाड़ा
  • जतन बाई
  • हेमराज कुमारिया
  • हेमराज विश्वकर्मा
  • राय सिंह गुर्जर

कैसे चलता था तस्करी का नेटवर्क

पूछताछ में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम करता था।

  • लड़कियों को बहला-फुसलाकर लाया जाता था
  • एक व्यक्ति उन्हें खरीदता था
  • फिर दूसरे व्यक्ति को ज्यादा कीमत में बेच दिया जाता था
  • बीच में दलालों को 10-10 हजार रुपए दिए जाते थे

पूर्व सरपंच ने कबूल किया कि इस धंधे में हर व्यक्ति को उसके काम के हिसाब से पैसा मिलता था।


कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 142, 143 और 144 के तहत मानव तस्करी का मामला दर्ज किया है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जो कई जिलों में सक्रिय है। आगे की पूछताछ में और भी लोगों के शामिल होने की संभावना है।


समाज के लिए बड़ा खतरा

यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।

  • नाबालिग लड़कियों को शादी के नाम पर बेचना
  • परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाना
  • संगठित तरीके से मानव तस्करी

ये सभी बातें समाज की सुरक्षा और नैतिकता पर सवाल खड़े करती हैं।


क्या हैं कारण

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों के पीछे कई कारण होते हैं:

  • गरीबी और बेरोजगारी
  • सामाजिक असमानता
  • शिक्षा की कमी
  • कमजोर कानून व्यवस्था

इन कारणों का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह सक्रिय हो जाते हैं।


क्या करना जरूरी है

इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए:

  • जागरूकता बढ़ानी होगी
  • पुलिस निगरानी मजबूत करनी होगी
  • संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना देनी होगी
  • नाबालिगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा

जबलपुर का यह मामला मानव तस्करी के एक खतरनाक नेटवर्क को उजागर करता है, जो शादी जैसे पवित्र रिश्ते का इस्तेमाल अपराध के लिए कर रहा था।

पुलिस की कार्रवाई से इस गिरोह का पर्दाफाश तो हुआ है, लेकिन यह भी साफ है कि ऐसे नेटवर्क समाज में गहराई तक फैले हो सकते हैं।

अब जरूरत है सख्त कार्रवाई, जागरूकता और सिस्टम को मजबूत करने की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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