मध्य प्रदेश के इंदौर में शेयर मार्केट में मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एडवाइजरी कंपनी संचालक मनीष पांडे को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को रेसकोर्स रोड स्थित उसके ऑफिस के पास से पकड़ा गया, जिसके बाद अब उससे पूछताछ कर पूरे गिरोह की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, इन्फिनिक्स इन्फोटेक नाम की एडवाइजरी कंपनी के खिलाफ अप्रैल महीने में शिकायतें सामने आई थीं। देपालपुर सहित कई इलाकों के युवाओं ने आरोप लगाया था कि कंपनी उन्हें शेयर मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफा दिलाने और डीमैट अकाउंट खुलवाने का झांसा देकर लाखों रुपए ठग रही है।
जांच के दौरान यह सामने आया कि कंपनी सुनियोजित तरीके से लोगों को टारगेट करती थी। पहले ग्राहकों को फोन कॉल या ऑनलाइन माध्यम से संपर्क किया जाता, फिर उन्हें आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिलाया जाता। जब लोग निवेश के लिए तैयार हो जाते, तो उनसे अलग-अलग शुल्क और निवेश के नाम पर पैसे जमा कराए जाते थे। इसके बाद या तो उन्हें फर्जी रिपोर्ट्स दी जातीं या फिर संपर्क ही बंद कर दिया जाता।
इस मामले में पहले भी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लिया था। उस समय कंपनी पर छापा मारकर कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए गए थे। हालांकि, मुख्य आरोपी मनीष पांडे तब से फरार चल रहा था और लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था।

शनिवार रात पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर उसे पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के बाद भी वह गुपचुप तरीके से ऑफिस आता-जाता रहा, लेकिन इस बार पुलिस ने उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि इस पूरे नेटवर्क में तकनीकी सहयोग देने वाला एक अन्य युवक भी शामिल है, जिसका नाम विशाल बताया जा रहा है। यह युवक कंपनी को एडवाइजरी के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराता था, जिसके जरिए ग्राहकों को फर्जी डेटा और निवेश के झूठे आंकड़े दिखाए जाते थे। अब पुलिस उसकी तलाश में भी जुट गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय होने की आशंका है। इसी वजह से मनीष पांडे से लगातार पूछताछ कर उसके संपर्कों, बैंक लेन-देन और अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन निवेश और शेयर मार्केट एडवाइजरी कंपनियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना प्रमाणित और रजिस्टर्ड एडवाइजरी कंपनियों पर भरोसा करना निवेशकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ ठगी समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।
यह मामला निवेशकों के लिए एक चेतावनी भी है कि किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें, क्योंकि “जल्दी और ज्यादा मुनाफा” अक्सर ठगी का सबसे बड़ा जाल साबित होता है।