मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में एक दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां करंट की चपेट में आने से 6 गोवंश की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा न सिर्फ पशुहानि का मामला है, बल्कि बिजली व्यवस्था की लापरवाही और प्रशासनिक ढिलाई की ओर भी गंभीर इशारा करता है। घटना देहात थाना क्षेत्र के आनंदपुर भाटा इलाके की है, जहां मंगलवार सुबह यह हादसा सामने आया और पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

बताया जा रहा है कि सोमवार रात क्षेत्र में तेज आंधी और बारिश का दौर चला था। इसी दौरान भगत नगर कॉलोनी रोड स्थित आनंदपुर भाटा में 11 केवी बिजली लाइन का तार टूटकर जमीन पर गिर गया। रात के अंधेरे में यह स्थिति किसी के ध्यान में नहीं आ सकी, लेकिन सुबह जैसे ही ग्रामीणों ने टूटे हुए तार को जमीन पर देखा, उन्होंने तुरंत बिजली विभाग को इसकी सूचना दी।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने समय रहते बिजली कंपनी के कर्मचारियों को जानकारी दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद बिजली सप्लाई बंद करने में लापरवाही बरती गई। इसी बीच खेतों की ओर चरने गई करीब 6 गायें उस टूटे हुए तार की चपेट में आ गईं। जमीन पर गिरे तार में करंट प्रवाहित हो रहा था, जिससे सभी गायों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह दृश्य इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। उन्होंने बिजली कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह हादसा पूरी तरह से विभाग की लापरवाही का परिणाम है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से बिजली के तार नीचे झूल रहे थे और इस संबंध में विभाग को पहले ही सूचना दी जा चुकी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। यदि समय रहते सुधार कार्य किया गया होता, तो इस तरह की घटना टाली जा सकती थी।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि 11 केवी लाइन जैसे हाई वोल्टेज क्षेत्र में कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे और न ही किसी प्रकार का सुरक्षा घेरा बनाया गया था। ऐसे में खुले में गिरे तार किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते थे। लोगों का कहना है कि अगर इस दौरान कोई व्यक्ति उस तार की चपेट में आ जाता, तो यह घटना और भी भयावह रूप ले सकती थी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। देहात थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। साथ ही, बिजली विभाग के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया। घटना के बाद तत्काल प्रभाव से बिजली सप्लाई बंद कर दी गई और टूटे हुए तार की मरम्मत का कार्य शुरू किया गया।
इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। अक्सर देखा जाता है कि गांवों में बिजली के तार पुराने और जर्जर हो चुके होते हैं, लेकिन उनके रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। तेज हवा या बारिश के दौरान ऐसे तार टूटकर गिर जाते हैं और लंबे समय तक जमीन पर पड़े रहते हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों और पशुपालकों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें इस नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि गायें उनके लिए सिर्फ पशु नहीं बल्कि आजीविका का साधन भी हैं। एक साथ 6 गोवंश की मौत ने उन्हें आर्थिक और भावनात्मक दोनों रूप से आहत किया है।

इस घटना के बाद प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर क्यों समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। क्या बिजली विभाग की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर हो गई है कि बार-बार सूचना देने के बाद भी सुधार कार्य नहीं किए जाते? यह सवाल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए बिजली लाइनों का नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है। इसके अलावा, जहां भी तार नीचे झूलते हुए पाए जाएं, उन्हें तुरंत ठीक किया जाना चाहिए। साथ ही, ग्रामीणों को भी इस तरह की स्थिति में सतर्क रहने और दूर रहने की सलाह दी जानी चाहिए।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है। यदि जांच में बिजली विभाग की लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
यह घटना एक चेतावनी भी है कि यदि समय रहते बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन, बिजली विभाग और आम नागरिक मिलकर इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए गंभीरता से प्रयास करें, ताकि किसी की जान या संपत्ति को नुकसान न पहुंचे।