दमोह जिले की हटा तहसील के रसीलपुर गांव में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सामाजिक एकता और इंसानियत की मिसाल पेश की। यहां सरपंच कमल दुबे ने एक गरीब दलित परिवार की बेटी की शादी को न सिर्फ संपन्न कराया, बल्कि उसका पूरा खर्च उठाकर यह साबित किया कि जनप्रतिनिधि अगर चाहें तो समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
यह शादी पूरन बंसल की बेटी अर्चना और छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा निवासी करन बंसल के बीच संपन्न हुई। बुधवार रात बारात जब रसीलपुर गांव पहुंची तो पूरे गांव ने मिलकर बारातियों का जोरदार स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच यह विवाह समारोह भव्य रूप से संपन्न हुआ।

आर्थिक तंगी में जूझ रहा था परिवार
अर्चना के माता-पिता मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण बेटी की शादी को लेकर चिंता बनी हुई थी। यह उनके घर की सबसे बड़ी बेटी है और परिवार में यह पहला विवाह था, इसलिए जिम्मेदारी और भी बढ़ गई थी।
इसी दौरान सरपंच कमल दुबे ने आगे आकर इस परिवार की मदद करने का निर्णय लिया। उन्होंने न केवल शादी का पूरा खर्च उठाया, बल्कि शादी से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं भी अपने स्तर पर कराईं।
सरपंच ने निभाई पूरी जिम्मेदारी
सरपंच कमल दुबे ने बताया कि जब लगुन के समय उन्हें परिवार की स्थिति के बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत मदद करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते यह उनकी जिम्मेदारी है कि किसी भी गरीब परिवार को उसकी खुशियों में अकेला न छोड़ा जाए।
उन्होंने शादी में खाने-पीने की व्यवस्था, टेंट, सजावट और अन्य सभी जरूरी इंतजाम किए। इसके साथ ही दहेज के रूप में पलंग, कूलर, अलमारी और अन्य घरेलू सामान भी उपलब्ध कराया गया, ताकि नवविवाहित दंपति को शुरुआती जीवन में कोई परेशानी न हो।

पूरे गांव ने निभाई भागीदारी
इस शादी की खास बात यह रही कि सिर्फ सरपंच ही नहीं, बल्कि पूरा गांव इस आयोजन में शामिल हुआ। ग्रामीणों ने मिलकर बेटी को आशीर्वाद दिया और उसे विदा किया। माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा था, जहां जाति और वर्ग की सीमाएं कहीं नजर नहीं आईं।
सामाजिक समरसता का संदेश
इस मौके पर मौजूद जिला पंचायत सदस्य मनीष तंतुवाय ने भी सरपंच के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि रसीलपुर गांव में जो हुआ वह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का उदाहरण है। ऐसे प्रयास समाज में समानता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि आज भी कई जगहों पर सामाजिक भेदभाव देखने को मिलता है, जहां दलित परिवारों को कई अवसरों से वंचित रखा जाता है, लेकिन इस तरह के कदम समाज को नई दिशा देते हैं।

बदलते समाज की झलक
यह घटना केवल एक विवाह समारोह नहीं, बल्कि बदलते समाज की झलक भी है, जहां जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मिलकर सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सरपंच कमल दुबे का यह प्रयास यह संदेश देता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो कोई भी व्यक्ति समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
संदेश पूरे समाज के लिए
रसीलपुर की यह शादी इस बात का उदाहरण बन गई है कि इंसानियत और सहयोग की भावना किसी भी सामाजिक बाधा से बड़ी होती है। यह घटना उन सभी जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों के लिए प्रेरणा है जो अपने क्षेत्र में काम करते हैं।
इस तरह के प्रयास न केवल जरूरतमंद परिवारों की मदद करते हैं, बल्कि समाज में एकता, सम्मान और समानता की भावना को भी मजबूत करते हैं।