मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मुरार इलाके में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को साइबर अपराधियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से अपने जाल में फंसाकर 7 लाख रुपए से अधिक की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को निजी बैंक का कर्मचारी बताकर पहले पीड़ित का विश्वास जीता और फिर फर्जी प्रक्रिया के नाम पर किस्तों में लाखों रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। हैरानी की बात यह रही कि पीड़ित को मामला दर्ज कराने के लिए भी करीब तीन महीने तक पुलिस और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े। आखिरकार मुरार थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार मुरार क्षेत्र के त्यागी नगर निवासी 32 वर्षीय विपिन कुमार सिंह एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। वे बेंगलुरु स्थित कंपनी में नौकरी करते हैं। अगस्त 2025 में उन्हें कुछ आर्थिक जरूरत होने के कारण उन्होंने एचडीएफसी बैंक में लोन के लिए आवेदन किया था। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल आने लगे। कॉल करने वाले लोग उन्हें आकर्षक लोन ऑफर देने की बात कर रहे थे।
इसी दौरान विपिन के पास ‘दिव्यांशु हंस’ नाम के युवक का कॉल आया। उसने खुद को आईसीआईसीआई बैंक का कर्मचारी बताते हुए बातचीत शुरू की। आरोपी ने बेहद पेशेवर तरीके से बात की और खुद को बैंक अधिकारी साबित करने के लिए कई बैंकिंग शब्दों का इस्तेमाल किया। शुरुआत में विपिन ने उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया और कहा कि उनका काम पहले ही एचडीएफसी बैंक से हो चुका है। लेकिन आरोपी ने भविष्य में अधिक राशि और कम ब्याज दर पर लोन दिलाने का लालच देकर उन्हें धीरे-धीरे अपने विश्वास में ले लिया।

ठग ने विपिन को ‘Track My Loan’ नामक एक मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने और उसमें अपने जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के लिए कहा। आरोपी ने दावा किया कि इससे भविष्य में उन्हें आसान लोन सुविधा मिल सकेगी। विपिन उसकी बातों में आ गए और आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक डिटेल सहित कई जरूरी दस्तावेज उस ऐप पर अपलोड कर दिए।
कुछ दिनों बाद अचानक विपिन के बैंक खाते में आईसीआईसीआई बैंक से लगभग 24 लाख 91 हजार रुपए का भारी-भरकम लोन क्रेडिट हो गया। यह देखकर वे घबरा गए, क्योंकि उन्होंने इस बैंक से किसी प्रकार का लोन आवेदन नहीं किया था। उन्हें लगा कि शायद कोई तकनीकी गलती हो गई है। उन्होंने तुरंत दिव्यांशु हंस से संपर्क किया और इस बारे में जानकारी मांगी।
यहीं से साइबर ठगों का असली खेल शुरू हुआ। आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से विपिन को भरोसा दिलाया कि यह लोन गलती से जारी हुआ है और वह बैंक के सिस्टम से इसे बंद करा देगा। उसने कहा कि इसके लिए कुछ “प्रोसेसिंग चार्ज”, “सिस्टम अपडेट फीस” और “लोन क्लोजर शुल्क” जमा करना होगा। आरोपी ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराने को कहा।
विपिन लगातार आरोपी के संपर्क में बने रहे और उसे बैंक कर्मचारी मानकर उसकी बातों पर भरोसा करते गए। धीरे-धीरे उन्होंने कुल 7 लाख 9 हजार 691 रुपए विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। आरोपी हर बार कहता रहा कि जल्द ही लोन पूरी तरह बंद हो जाएगा और खाते से हट जाएगा। लेकिन रकम जमा कराने के बाद भी लोन बंद नहीं हुआ।
कुछ समय बाद जब विपिन ने दोबारा आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की तो उसका मोबाइल नंबर बंद मिला। बाद में पता चला कि आरोपी ने उनका नंबर ब्लॉक कर दिया है। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
घटना के बाद पीड़ित ने मुरार थाना पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। लेकिन प्रारंभिक स्तर पर मामला दर्ज नहीं हो सका। पीड़ित पिछले करीब तीन महीने से पुलिस अधिकारियों और संबंधित विभागों के चक्कर काटते रहे। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप और प्रारंभिक जांच के बाद आखिरकार पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और साइबर अपराध की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। साइबर सेल की टीम को भी जांच में शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल डेटा के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि यह किसी संगठित साइबर गिरोह का काम हो सकता है, जो लोगों का डेटा हासिल कर उन्हें लोन और बैंकिंग सेवाओं के नाम पर निशाना बनाता है।
इस घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल साइबर अपराधी बेहद पेशेवर तरीके से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। वे बैंक अधिकारी बनकर बात करते हैं और फर्जी ऐप तथा वेबसाइट के जरिए लोगों के दस्तावेज और बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि किसी भी अनजान ऐप पर अपने बैंकिंग दस्तावेज अपलोड न करें। बैंक कभी भी निजी खातों में पैसे जमा कराने के लिए नहीं कहता। यदि किसी लोन या बैंकिंग प्रक्रिया को लेकर संदेह हो तो सीधे संबंधित बैंक शाखा से संपर्क करें। साथ ही ओटीपी, बैंक डिटेल और व्यक्तिगत जानकारी किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें।
फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही साइबर ठगों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।