मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल द्वारा जारी निर्देशों के तहत वर्ष 2026 की फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण कार्यक्रम की तैयारियां जिले में तेज हो गई हैं। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश तथा उप जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) के मार्गदर्शन में जिले के समस्त नगरीय निकायों और जनपद पंचायतों के मास्टर ट्रेनरों एवं डाटा एंट्री ऑपरेटरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज में किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आगामी नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनावों के लिए त्रुटिरहित, पारदर्शी और अद्यतन मतदाता सूची तैयार करना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिलेभर से आए अधिकारियों, कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ को निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया, समय-सारणी और तकनीकी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान निर्वाचन संबंधी कानूनी प्रावधानों, सॉफ्टवेयर संचालन, मतदाता सूची के निर्माण, दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया और विभिन्न जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

जिला मास्टर ट्रेनर डॉ. अमर कुमार जैन ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम 2026 की विस्तृत समय-सारणी को समझाते हुए कहा कि निर्वाचन संबंधी सभी कार्य आयोग द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किए जाने आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला होती है और यदि सूची में त्रुटियां रह जाती हैं तो इसका सीधा प्रभाव निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर पड़ता है। इसलिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।
डॉ. जैन ने कंट्रोल टेबल के सत्यापन, वेंडर की भूमिका, रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के दायित्व तथा मतदाता सूची से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक स्तर पर सटीकता बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि फोटोयुक्त मतदाता सूची तैयार करने में तकनीकी सावधानी के साथ-साथ क्षेत्रीय जानकारी का भी विशेष महत्व होता है।
जिला मास्टर ट्रेनर श्री आनंद मंगल बोहरे ने ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के लिए वार्डवार मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2026 की स्थिति को आधार मानते हुए मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इस दौरान नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने और आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी।

उन्होंने प्रशिक्षण में उपस्थित डाटा एंट्री ऑपरेटरों को सीडी, डीवीडी तथा ईएमआरएस सॉफ्टवेयर के उपयोग की तकनीकी जानकारी दी। साथ ही नवीन गठित निकायों और बदले हुए वार्ड परिसीमन की स्थिति में मतदाता सूची निर्माण की विशेष प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि डिजिटल डेटा का सही संधारण निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाता है।
जिला मास्टर ट्रेनर श्री मनीष सक्सेना ने नगर पालिका अधिनियम 1956, 1961 और 1994 की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए ग्रामीण और नगरीय निकायों की मतदाता सूचियों के बीच के महत्वपूर्ण अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि पंचायत एवं नगरीय निकायों की निर्वाचन प्रक्रिया में कई तकनीकी और प्रशासनिक अंतर होते हैं, जिनका सही ज्ञान होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची तैयार करते समय संबंधित अधिनियमों एवं नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
स्थानीय निकाय निर्वाचन पर्यवेक्षक श्री बेनी प्रसाद प्रजापति ने प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए कहा कि निर्वाचन कार्य अत्यंत संवेदनशील और जिम्मेदारीपूर्ण होता है। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से समन्वय के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सभी संबंधित विभाग और कर्मचारी आपसी तालमेल के साथ कार्य करेंगे तो मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य सुचारू रूप से पूरा किया जा सकेगा।
उन्होंने डाटा एंट्री ऑपरेटरों को विशेष रूप से निर्देशित करते हुए कहा कि वे सभी प्रविष्टियां सावधानीपूर्वक करें और निर्वाचन आयोग के निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में बड़ी प्रशासनिक समस्या का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में ईवीएम नोडल अधिकारी श्री राजीव एलेक्सजेंडर एवं श्री परमानंद सेन ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से संबंधित प्रक्रियाओं तथा निर्वाचन तैयारियों के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और विश्वसनीय बनाया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. सर्वेश्वर उपाध्याय ने दावे और आपत्तियों की कार्रवाई को विस्तार से स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची के प्रारंभिक प्रकाशन के बाद नागरिकों को अपने नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए निर्धारित समयावधि में दावा एवं आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। इन दावों और आपत्तियों का नियमानुसार परीक्षण कर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
उन्होंने स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित करने तथा मतदाता सूची एजेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों की भागीदारी निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाती है। इसलिए मतदाता सूची एजेंटों की नियुक्ति और उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। कार्यक्रम में तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ निर्वाचन संबंधी नियमों एवं प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई, जिससे प्रतिभागियों को आगामी कार्यों को बेहतर तरीके से संपादित करने में सहायता मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मतदाता सूची में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम शामिल करना और अपात्र नामों को हटाना निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होता है।
जिले में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्वाचन तैयारियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि आयोग द्वारा निर्धारित सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध एवं त्रुटिरहित तरीके से पूर्ण हों, ताकि आगामी चुनावों में मतदाता बिना किसी परेशानी के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।