छतरपुर नेशनल लोक अदालत में 1901 मामलों का निराकरण: 6 करोड़ से अधिक के अवार्ड पारित, कई परिवार फिर हुए एक !

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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशन में शनिवार को छतरपुर जिला न्यायालय सहित जिले की सभी तहसील न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान लंबित और प्रीलिटिगेशन स्तर के कुल 1901 मामलों का आपसी समझौते और सुलह के आधार पर निराकरण किया गया। लोक अदालत में 6 करोड़ 25 लाख रुपए से अधिक के अवार्ड पारित किए गए। कई वर्षों से लंबित विवादों का समाधान होने पर पक्षकारों ने राहत महसूस की, वहीं कई टूटते परिवार भी फिर से एक हो गए।

जिला न्यायालय छतरपुर में कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष रविन्द्र सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी और बड़ी संख्या में पक्षकार मौजूद रहे।

31 खंडपीठों में हुई सुनवाई

लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिला न्यायालय और तहसील न्यायालयों में कुल 31 खंडपीठों का गठन किया गया था। इन खंडपीठों में विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की गई। न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की समझाइश के बाद कई मामलों में पक्षकार आपसी सहमति से राजी हो गए।

लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों में लंबित 686 मामलों का निराकरण किया गया। इनमें आपराधिक मामले, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा, विद्युत विवाद, वैवाहिक विवाद और अन्य प्रकरण शामिल रहे। इन मामलों में कुल 4 करोड़ 93 लाख 80 हजार 134 रुपए के अवार्ड पारित किए गए।

प्रीलिटिगेशन के 1215 मामलों का भी हुआ निपटारा

लोक अदालत में केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का ही नहीं, बल्कि प्रीलिटिगेशन स्तर के मामलों का भी समाधान किया गया। कुल 1215 प्रीलिटिगेशन मामलों का निराकरण हुआ, जिनमें बैंक ऋण, बिजली बिल, वाटर टैक्स और अन्य राजस्व संबंधी विवाद शामिल थे।

इन मामलों में पक्षकारों ने आपसी सहमति से समझौता कर विवाद समाप्त किए। प्रीलिटिगेशन मामलों में कुल 1 करोड़ 31 लाख 20 हजार 648 रुपए के अवार्ड पारित किए गए। अधिकारियों के अनुसार लोक अदालत के माध्यम से लोगों को त्वरित और सरल न्याय उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

लोक अदालत में फिर जुड़े टूटते रिश्ते

नेशनल लोक अदालत में कई पारिवारिक विवाद भी सुलझे, जिससे कई परिवार टूटने से बच गए। ग्राम नारायणपुरा निवासी भैयालाल अनुरागी और उनकी पत्नी रामरति अनुरागी के बीच करीब दो वर्षों से विवाद चल रहा था। दोनों के बीच मतभेद इतना बढ़ गया था कि मामला न्यायालय तक पहुंच गया था। लेकिन लोक अदालत में न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की समझाइश के बाद दोनों ने पुराने विवाद भुलाकर दोबारा साथ रहने का निर्णय लिया।

इसी प्रकार महाराजपुर निवासी कमलेश और रामबाई के बीच लंबे समय से चला आ रहा वैवाहिक विवाद भी समाप्त हो गया। दोनों पक्षों को समझाने के बाद पति-पत्नी आपसी सहमति से साथ रहने को तैयार हो गए। समझौते के बाद दोनों ने एक-दूसरे को फूलमाला पहनाई। न्यायालय की ओर से उन्हें पौधा भेंट कर सुखद वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दी गईं। यह दृश्य लोक अदालत में मौजूद लोगों के लिए भावुक और प्रेरणादायक बन गया।

त्वरित न्याय का प्रभावी माध्यम बनी लोक अदालत

न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि लोक अदालत लोगों को कम समय में सरल और सस्ता न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है। इससे न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होता है, बल्कि आपसी समझ और संवाद से रिश्ते भी बचते हैं।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविन्द्र सिंह ने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य केवल मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि लोगों के बीच सौहार्द और विश्वास कायम करना भी है। उन्होंने कहा कि आपसी सहमति से सुलझाए गए विवाद लंबे समय तक शांति बनाए रखते हैं।

बड़ी संख्या में पहुंचे पक्षकार

लोक अदालत में जिलेभर से बड़ी संख्या में लोग अपने मामलों के निराकरण के लिए पहुंचे। न्यायालय परिसर में सुबह से ही हलचल बनी रही। कई लोग वर्षों पुराने मामलों के निपटारे से संतुष्ट नजर आए। वहीं बैंक, बिजली विभाग और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने समझौते के आधार पर मामलों का समाधान कराया।

लोक अदालत के सफल आयोजन को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और न्यायालय प्रशासन ने संतोष व्यक्त किया। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन के माध्यम से लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने का प्रयास जारी रहेगा।

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