‘सार्थक’ एप से कृषि विभाग पर डिजिटल निगरानी: खेत में खड़े होकर देनी होगी रियल टाइम रिपोर्ट !

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मध्यप्रदेश की मध्यप्रदेश सरकार ने ‘कृषि कल्याण वर्ष’ के संकल्प को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए कृषि विभाग में बड़ी डिजिटल व्यवस्था लागू की है। अब कृषि विभाग के मैदानी अमले की हर गतिविधि पर सरकार की सीधी नजर रहेगी। अधिकारी और कर्मचारी अब कार्यालय में बैठकर फील्ड विजिट की रिपोर्ट तैयार नहीं कर पाएंगे, बल्कि उन्हें खेत में मौजूद रहकर ‘सार्थक’ एप के जरिए अपने काम की रियल टाइम रिपोर्टिंग करनी होगी।

सरकार की यह नई व्यवस्था कृषि सेवाओं को पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे किसानों तक योजनाओं और तकनीकी सलाह का लाभ अधिक तेजी और सटीकता से पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।

जियो-फेंसिंग तकनीक से रुकेगी फर्जी रिपोर्टिंग

नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘जियो-फेंसिंग’ और ‘जियो-टैगिंग’ तकनीक पर आधारित होगी। कृषि विस्तार अधिकारी या कर्मचारी जब किसी किसान के खेत पर पहुंचेंगे, तब उन्हें ‘सार्थक’ एप यानी समेकित लक्षित विस्तार क्षेत्र भ्रमण प्रबंधन प्रणाली पर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी।

एप तभी उनकी रिपोर्ट स्वीकार करेगा, जब उनकी लोकेशन वास्तव में उसी खेत या निर्धारित क्षेत्र में होगी। यानी अब केवल कागजों पर दौरे दिखाकर रिपोर्ट तैयार करना संभव नहीं होगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को मौके से लाइव फोटो भी अपलोड करनी होगी, जिससे फर्जी फील्ड विजिट और खानापूर्ति पर रोक लगेगी।

खेत से सीधे मुख्यालय तक पहुंचेगा डेटा

सरकार द्वारा तैयार इस हाईटेक सिस्टम के तहत कर्मचारी खेत पर खड़े होकर ही फसल की स्थिति, कीट रोगों का असर, मिट्टी की गुणवत्ता और अन्य कृषि संबंधी जानकारियां एप पर दर्ज करेंगे। यह डेटा तुरंत मुख्यालय तक पहुंचेगा।

इससे विभागीय अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ रियल टाइम में हालात की निगरानी कर सकेंगे। यदि किसी क्षेत्र में बीमारी, कीट प्रकोप या अन्य संकट की स्थिति बनती है, तो विशेषज्ञ तत्काल तकनीकी सलाह जारी कर सकेंगे।

डिजिटल वर्क लॉग में दर्ज होगी हर गतिविधि

‘सार्थक’ एप सिर्फ रिपोर्टिंग का माध्यम नहीं होगा, बल्कि इससे कृषि विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों का पूरा डिजिटल ‘वर्क लॉग’ भी तैयार होगा।

इसमें शामिल होगा—

  • फील्ड विजिट का रिकॉर्ड
  • बैठकों में उपस्थिति
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी
  • सौंपे गए विशेष कार्यों की प्रगति
  • किसानों से संपर्क और गतिविधियां

वरिष्ठ अधिकारी इस डिजिटल रिकॉर्ड को कभी भी देख सकेंगे। इससे कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और कामकाज में पारदर्शिता आएगी।

मुख्यालय से मिलेगा लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम

नई व्यवस्था में मुख्यालय द्वारा दिए गए विशेष कार्य सीधे अधिकारियों के डैशबोर्ड पर दिखाई देंगे। अधिकारी उस पर की गई कार्रवाई और प्रगति को लाइव अपडेट करेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं की निगरानी आसान होगी और जमीनी स्तर पर काम की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। साथ ही समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

किसानों को होंगे कई बड़े फायदे

इस डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों की फील्ड में मौजूदगी अनिवार्य होने से किसानों को कृषि सलाह और मार्गदर्शन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

इसके अलावा—

  • फसल रोग की स्थिति में तुरंत तकनीकी सलाह मिलेगी
  • खाद और बीज वितरण अधिक सटीक होगा
  • सब्सिडी पात्र किसानों तक सीधे पहुंचेगी
  • बिचौलियों की भूमिका कम होगी
  • योजनाओं का लाभ तेजी से मिलेगा

सरकार के पास हर क्षेत्र का वास्तविक और साक्ष्य आधारित डेटा उपलब्ध रहेगा, जिसके आधार पर कृषि योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा।

16 विभागों का डेटा एक प्लेटफॉर्म पर

सरकार इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं रख रही है। सिंचाई, पशुपालन, उद्यानिकी सहित कुल 16 विभागों का डेटा भी एकीकृत रूप से इसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा।

इससे योजनाओं में दोहराव रुकेगा और किसानों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार इसे किसानों के लिए ‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ के रूप में विकसित कर रही है।

कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी

सरकार का उद्देश्य इस नई प्रणाली के जरिए कृषि विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाना है। इससे फील्ड स्तर पर काम की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है, तो इससे कृषि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों को समय पर मदद मिल सकेगी। फिलहाल विभागीय अमले को एप के उपयोग और डिजिटल रिपोर्टिंग को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

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