बच्चों के खेल मैदान पर पंचायत भवन निर्माण का आरोप: खुरई के प्यासी गांव में सरपंच की मनमानी पर ग्रामीणों में आक्रोश !

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सागर जिले की खुरई तहसील अंतर्गत ग्राम प्यासी में पंचायत स्तर पर कथित मनमानी का मामला सामने आया है। गांव के प्राथमिक स्कूल के खेल मैदान पर पंचायत भवन का निर्माण शुरू किए जाने से ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी फैल गई है। आरोप है कि सरपंच ने बिना शिक्षा विभाग की अनुमति के बच्चों के खेल मैदान में निर्माण कार्य शुरू करा दिया, जबकि गांव में अन्य सरकारी जमीनें उपलब्ध हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस मैदान पर पंचायत भवन की नींव खोदी जा रही है, वह वर्षों से स्कूल के बच्चों और गांव के युवाओं के खेलकूद का एकमात्र स्थान रहा है। अब निर्माण कार्य शुरू होने से बच्चों की खेल गतिविधियां प्रभावित होने लगी हैं।

बच्चों के खेल मैदान पर शुरू हुआ निर्माण

जानकारी के अनुसार ग्राम प्यासी के प्राथमिक स्कूल परिसर के पास स्थित खेल मैदान में हाल ही में पंचायत भवन निर्माण के लिए नींव खोदने का काम शुरू किया गया। ग्रामीणों ने जब निर्माण सामग्री और मजदूरों को मैदान में काम करते देखा, तो इसका विरोध शुरू हो गया।

गांव के लोगों का कहना है कि यह मैदान केवल स्कूल के बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के युवाओं के लिए खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र है। यहां रोजाना बच्चे क्रिकेट, कबड्डी और अन्य खेल खेलते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में पंचायत भवन निर्माण के लिए अन्य सरकारी जमीनें खाली पड़ी हैं, लेकिन वहां निर्माण नहीं किया जा रहा।

सरपंच पर कब्जा बचाने का आरोप

ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच सत्यम कुर्मी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि गांव की दूसरी सरकारी जमीनों पर कथित रूप से कब्जा किया गया है और उन स्थानों को खाली कराने के बजाय अब बच्चों के खेल मैदान को निशाना बनाया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन को जानबूझकर स्कूल मैदान में बनाया जा रहा है ताकि अन्य जमीनों पर बना कब्जा प्रभावित न हो। इस मुद्दे को लेकर गांव में लगातार चर्चा और विरोध का माहौल बना हुआ है।

कुछ ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत भवन जैसी सार्वजनिक सुविधा का निर्माण जरूरी है, लेकिन इसके लिए बच्चों के खेल मैदान को खत्म करना उचित नहीं है।

शिक्षा विभाग से नहीं ली गई अनुमति

मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले शिक्षा विभाग या स्कूल प्रबंधन से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई।

स्कूल की हेडमास्टर देवकी ठाकुर ने बताया कि उन्हें खेल मैदान में निर्माण शुरू होने की जानकारी बाद में मिली। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में उनकी ड्यूटी जनगणना कार्य में लगी हुई है, जिसके कारण वह लगातार स्कूल में मौजूद नहीं रह पा रही हैं। ऐसे में निर्माण कार्य कब शुरू हुआ, इसकी जानकारी उन्हें बाद में मिली।

सरपंच ने बात करने से किया इनकार

जब इस मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच सत्यम कुर्मी से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उनके पास फिलहाल बात करने का समय नहीं है।

सरपंच की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के बाद ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी दिखाई दी। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य नियमों के तहत किया जा रहा है, तो पंचायत को सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी देनी चाहिए।

प्रशासन ने दिए निर्माण रोकने के निर्देश

मामला सामने आने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। मनोज चौरसिया ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी।

उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रशासनिक टीम को मौके पर भेजा जाएगा और यदि निर्माण कार्य नियमों के विरुद्ध पाया गया तो उसे तुरंत रुकवाया जाएगा।

एसडीएम ने यह भी कहा कि सार्वजनिक उपयोग की जमीनों और स्कूल परिसरों से जुड़े मामलों में नियमों का पालन अनिवार्य है। बिना अनुमति निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ग्रामीणों ने जनपद अधिकारियों पर लगाए आरोप

गांव के लोगों का कहना है कि जनपद पंचायत स्तर पर निगरानी कमजोर होने के कारण कई पंचायतों में इस तरह की मनमानी बढ़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधि अपनी सुविधा के अनुसार सरकारी जमीनों का उपयोग कर रहे हैं और अधिकारी समय पर हस्तक्षेप नहीं कर रहे।

लोगों ने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बच्चों के पास खेलने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं बचेगा। इससे गांव में खेलकूद और बच्चों के शारीरिक विकास पर असर पड़ेगा।

बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता

ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि खेल मैदान को सुरक्षित रखा जाए और पंचायत भवन के लिए किसी अन्य स्थान का चयन किया जाए।

उनका कहना है कि गांवों में पहले ही बच्चों के लिए खेल सुविधाएं सीमित हैं। यदि स्कूलों के मैदान भी निर्माण कार्यों में खत्म कर दिए जाएंगे, तो बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होगा।

फिलहाल प्रशासनिक जांच और कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। गांव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य पर उचित निर्णय लिया जाएगा।

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