व्यापमं घोटाले से जुड़ा ‘डिग्री खेल’ फिर सुर्खियों में, GRMC–जीवाजी यूनिवर्सिटी पर सवाल, लोकायुक्त जांच तेज !

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ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) और जीवाजी विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। बहुचर्चित व्यापमं (Vyapam Scam) से जुड़े मामले में बर्खास्त किए गए एमबीबीएस छात्रों को कथित तौर पर फिर से डिग्री देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था, मेडिकल प्रशासन और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

बर्खास्त छात्रों को फिर डिग्री देने का आरोप

मामले में आरोप है कि वर्ष 2006 से 2010 के बीच एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले लगभग 25 छात्रों को व्यापमं प्रकरण में नाम आने के बाद वर्ष 2017 में “न्यू हाई पावर एक्शन कमेटी” द्वारा बर्खास्त कर दिया गया था। लेकिन बाद में कथित रूप से इन्हीं छात्रों को दोबारा एमबीबीएस की डिग्रियां जारी कर दी गईं।

इस खुलासे के बाद यह सवाल उठने लगा है कि जब एक बार छात्रों को बर्खास्त किया जा चुका था, तो फिर किन नियमों और दस्तावेजों के आधार पर उन्हें डिग्री दी गई।

ऑडियो क्लिप से हुआ खुलासा

इस मामले को और गंभीर तब माना गया जब कॉलेज प्रशासन से जुड़े एक कर्मचारी और पूर्व छात्र के बीच बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ। इस ऑडियो में कथित रूप से कॉलेज के यूजी सेक्शन के तत्कालीन प्रभारी बाबू प्रशांत चतुर्वेदी यह स्वीकार करते सुनाई देते हैं कि कुछ “लंबित मामले” निपटाए गए हैं।

ऑडियो में यह भी दावा सामने आया कि डिग्री से जुड़े मामलों में पैसों के लेन-देन की बात हुई, जिसमें लगभग 16 लाख रुपये तक की रकम का उल्लेख बताया गया है। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

लोकायुक्त की एंट्री, दस्तावेजों की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मध्यप्रदेश लोकायुक्त संगठन ने जांच शुरू कर दी है। भोपाल और ग्वालियर लोकायुक्त टीमों ने GRMC और जीवाजी विश्वविद्यालय से संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए हैं।

लोकायुक्त अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि डीन, रजिस्ट्रार और प्रशासनिक स्तर के कई अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

पूर्व मेडिकल छात्र संदीप लहारिया ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि जिन छात्रों को 2017 में आधिकारिक रूप से बर्खास्त किया गया था, उन्हें बाद में गुपचुप तरीके से डिग्रियां दी गईं।

संदीप का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत राज्यपाल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन तक भी की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

कॉलेज कर्मचारी पर भी सवाल

मामले में कॉलेज के एक कर्मचारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह का नाम सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, ऑडियो और लेन-देन रिकॉर्ड इस ओर इशारा करते हैं कि लंबित मामलों के निपटारे में अनियमितताएं हुई हैं।

हालांकि संबंधित कर्मचारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें किसी भी संदीप नाम के व्यक्ति की जानकारी नहीं है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं।

पहले हटाया गया एक अधिकारी, दूसरे पर कार्रवाई नहीं

ऑडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने प्रशांत चतुर्वेदी को उनके पद से हटा दिया था, लेकिन उनके सहायक पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जांच में दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।

व्यापमं की छाया में फिर उठे सवाल

मध्यप्रदेश का व्यापमं घोटाला (Vyapam Scam) देश के सबसे बड़े शिक्षा और भर्ती घोटालों में से एक माना जाता है। इस नए मामले ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि क्या पुराने घोटाले से जुड़े नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न सिर्फ संस्थागत भ्रष्टाचार का उदाहरण होगा, बल्कि भविष्य के डॉक्टरों की योग्यता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा।

जांच के बाद सामने आएगा सच

फिलहाल लोकायुक्त जांच जारी है और दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। लेकिन यह मामला स्पष्ट करता है कि शिक्षा और प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

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