एमपी-यूपी-छत्तीसगढ़ में करोड़ों का जमीन घोटाला: ED ने दो मुख्य आरोपियों को किया गिरफ्तार !

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Enforcement Directorate ने मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में फैले करोड़ों रुपए के कथित भूमि घोटाले का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने द स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SRMF) की संपत्तियों की फर्जी बिक्री और हेराफेरी मामले में जी. राम चंद्र मोहन और आकाश मालवीय नामक दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों को नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें ईडी रिमांड पर भेज दिया गया।

ईडी द्वारा यह कार्रवाई 14 और 15 मई 2026 को की गई व्यापक छापेमारी के बाद की गई। जांच एजेंसी ने सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों के बैंक खातों एवं चल संपत्तियों को भी फ्रीज कर दिया है। कंपनी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन खरीद-बिक्री में शामिल होने का आरोप है।

कई राज्यों की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच

ईडी ने बताया कि उसने 7 मई 2026 को ईसीआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर की गई। आरोपियों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी पहचान तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को SRMF का अधिकृत पदाधिकारी बताकर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, नकली बोर्ड प्रस्ताव और जाली अनुमति पत्र तैयार किए। इन दस्तावेजों के माध्यम से ट्रस्ट की सैकड़ों करोड़ रुपए मूल्य की जमीनों को अवैध तरीके से बेच दिया गया।

फर्जी संस्था बनाकर किया खेल

ईडी की जांच में सामने आया कि जी. राम चंद्र मोहन इस पूरे नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड है। उसने खुद को SRMF का कोषाध्यक्ष बताकर समान नाम से एक फर्जी संस्था बनाई और नकली पैन कार्ड हासिल कर बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपए का लेनदेन किया।

वहीं, आकाश मालवीय ने खुद को ट्रस्ट का कार्यकारी सदस्य बताकर फर्जी बिक्री दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। जांच में सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रदीप सिंह की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

तीसरे पक्ष को भी बेची गई जमीन

ईडी का आरोप है कि संबंधित जमीन SRMF ट्रस्ट की होने और आरोपियों को उसे बेचने का कोई अधिकार नहीं होने के बावजूद सौदे किए गए। बाद में इन जमीनों के हिस्से तीसरे पक्ष को भी बेच दिए गए, जिससे करोड़ों रुपए के अवैध लेनदेन की आशंका जताई जा रही है।

जांच एजेंसी अब इस पूरे मामले में धन शोधन, संपत्ति हस्तांतरण और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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