मध्य प्रदेश के बीना और खुरई शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को वट सावित्री व्रत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही मंदिरों और वट वृक्षों के आसपास धार्मिक वातावरण देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार में सजकर पूजा स्थलों पर पहुंचीं। उन्होंने विधि-विधान से पूजा कर वट वृक्ष की परिक्रमा की और कच्चा सूत बांधकर पति की दीर्घायु की प्रार्थना की।
पूजा स्थलों पर उमड़ी महिलाओं की भीड़
बीना शहर के कटरा मंदिर, बड़ा मंदिर, खुरई रोड स्थित राम मंदिर, स्टेशन रोड स्थित जटाशंकर मंदिर और थाना परिसर में स्थित वट वृक्षों के पास महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई।
वहीं खुरई में पशु चिकित्सालय परिसर, खैरा नाका, जेल रोड, किला क्षेत्र, डोहेला और पुराने जनपद चौराहा सहित विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा की।

पूजा के दौरान महिलाएं थाल सजाकर फल, फूल, दीपक, रोली और पूजा सामग्री के साथ पहुंचीं। कई महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर परिवार की खुशहाली की कामना की।
वट वृक्ष की परिक्रमा कर बांधा कच्चा सूत
वट सावित्री व्रत के दौरान महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा की और उसके तने पर कच्चा सूत बांधा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट वृक्ष को दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
महिलाओं ने भगवान विष्णु, माता सावित्री और सत्यवान का स्मरण करते हुए सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मांगा। पूजा के दौरान व्रत कथा का श्रवण भी किया गया।
पूजा स्थलों पर महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर धार्मिक वातावरण को और भक्तिमय बना दिया।
पौराणिक कथा से जुड़ा है व्रत का महत्व
पुजारी रामगुलाम तिवारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना गया है।

पौराणिक कथा के अनुसार, माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और अटूट संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं।
उन्होंने बताया कि यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
महिलाओं ने मांगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
व्रत करने वाली महिलाओं ने कहा कि वट सावित्री का पर्व उनके लिए विशेष महत्व रखता है। राखी झा ने बताया कि इस दिन महिलाएं माता सावित्री के पतिव्रत धर्म और पति प्रेम को स्मरण कर अपने परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

महिलाओं ने परिवार की सुख-शांति, पति के उत्तम स्वास्थ्य और घर में समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखा उत्साह
बीना और खुरई के ग्रामीण इलाकों में भी महिलाओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ व्रत रखा। गांवों के मंदिरों और पुराने वट वृक्षों के नीचे सामूहिक पूजा-अर्चना की गई।
कई स्थानों पर महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत भी गाए। पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया गया और बुजुर्ग महिलाओं ने युवा महिलाओं को व्रत की धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी दी।
भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक
वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि वैवाहिक रिश्तों में प्रेम, विश्वास और समर्पण का भी प्रतीक है।
बीना और खुरई में श्रद्धा के साथ मनाया गया यह पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत करता नजर आया।