देश में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी का दौर जारी है। इस सप्ताह चांदी की कीमतों में बड़ी छलांग देखने को मिली है। 1 किलो चांदी का भाव एक ही हफ्ते में ₹12,900 बढ़कर ₹2.69 लाख तक पहुंच गया। वहीं सोना भी तेजी के साथ ऊपर चढ़ा और 10 ग्राम सोने की कीमत ₹7,132 बढ़कर ₹1.58 लाख हो गई। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों, ज्वेलर्स और आम ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की बढ़ती मांग, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सरकार द्वारा आयात शुल्क बढ़ाए जाने के कारण सोने-चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले समय में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
एक हफ्ते में चांदी में बड़ी छलांग
बीते सप्ताह यानी 9 मई तक 1 किलो चांदी का भाव करीब ₹2.56 लाख था। लेकिन कुछ ही दिनों में इसमें ₹12,900 की तेजी आ गई और अब कीमत ₹2.69 लाख तक पहुंच गई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता के कारण चांदी में यह उछाल देखने को मिला है।

चांदी को केवल निवेश का साधन ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और कई इंडस्ट्रीज में उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण धातु माना जाता है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
सोने की कीमत भी रिकॉर्ड स्तर के करीब
सोने में भी इस सप्ताह मजबूत तेजी दर्ज की गई। 9 मई को 10 ग्राम सोना लगभग ₹1.51 लाख पर कारोबार कर रहा था, जो अब बढ़कर ₹1.58 लाख पहुंच गया है। यानी एक सप्ताह में ही ₹7,132 की बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय तनाव, डॉलर की कमजोरी और सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोने की कीमतों को समर्थन मिल रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के समय निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, इसलिए इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है।
इस साल अब तक कितना महंगा हुआ सोना-चांदी?
साल 2026 की शुरुआत से ही सोना और चांदी लगातार महंगे हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार:
- 10 ग्राम सोना इस साल अब तक ₹25,015 महंगा हो चुका है।
- चांदी में भी ₹38,080 प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.33 लाख थी, जो अब ₹1.58 लाख तक पहुंच चुकी है। वहीं चांदी ₹2.30 लाख प्रति किलो से बढ़कर ₹2.69 लाख पर आ गई है।
ऑलटाइम हाई भी बना चुके हैं दाम
इस साल सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर भी छुए हैं। 29 जनवरी 2026 को सोना ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था, जबकि चांदी ने ₹3.86 लाख प्रति किलो का ऑलटाइम हाई बनाया था।
हालांकि उसके बाद कीमतों में कुछ गिरावट आई, लेकिन अब फिर तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात तनावपूर्ण बने रहे तो कीमती धातुओं में और तेजी आ सकती है।
सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी
सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों के पीछे सरकार द्वारा बढ़ाई गई आयात शुल्क भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है।
नई व्यवस्था के तहत:
- 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी
- 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC)
लगाया गया है। आयात शुल्क बढ़ने से विदेशों से आने वाला सोना-चांदी महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार की कीमतों पर पड़ा है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है सोना?
भारत में सोने को सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि सुरक्षित निवेश के रूप में भी देखा जाता है। आर्थिक अस्थिरता, महंगाई और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान लोग सोने में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय में सोना निवेशकों को स्थिर रिटर्न देता है। यही कारण है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद इसकी मांग बनी हुई है। शादी-विवाह के सीजन और त्योहारों के समय भी सोने की खरीदारी बढ़ जाती है।
ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों ने ग्राहकों को सोना खरीदते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। खासतौर पर दो बातों का ध्यान रखना जरूरी बताया गया है।
1. हमेशा हॉलमार्क वाला सोना खरीदें
सोना खरीदते समय यह जरूर जांच लें कि उस पर Bureau of Indian Standards यानी BIS का हॉलमार्क मौजूद हो। हॉलमार्क यह प्रमाणित करता है कि सोना शुद्ध और तय कैरेट का है। हॉलमार्क नंबर अल्फान्यूमेरिक कोड के रूप में लिखा होता है।
2. कीमत की जांच जरूर करें
सोना खरीदने से पहले कई विश्वसनीय स्रोतों से उसकी कीमत की पुष्टि करनी चाहिए। 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम अलग-अलग होते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले सही रेट और वजन की जानकारी जरूरी है।
आगे क्या रह सकता है रुख?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में सोना और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि वैश्विक आर्थिक संकट, युद्ध या डॉलर में कमजोरी बनी रहती है तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है, जिससे कीमतों में अस्थायी गिरावट आ सकती है। इसके बावजूद लंबे समय के निवेश के लिहाज से सोना और चांदी अभी भी मजबूत विकल्प माने जा रहे हैं।