स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में सागर नगर निगम को मिली 10वीं रैंक: साफ-सफाई, जनभागीदारी और प्रशासनिक प्रतिबद्धता की मिसाल !

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर वर्ष आयोजित होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण में देश भर के शहरी निकायों की स्वच्छता व्यवस्था, नागरिक सुविधाओं और जनभागीदारी के आधार पर रैंकिंग की जाती है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में मध्यप्रदेश के सागर नगर निगम ने एक बड़ी छलांग लगाई है। जहां वर्ष 2023 में सागर की रैंक 70वीं थी, वहीं 2024 में शहर ने देशभर में 10वीं रैंक हासिल की है। यह सफलता न केवल नगर निगम की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि शहरवासियों की जागरूकता और सहयोग का भी प्रमाण है।


रैंकिंग में सुधार के प्रमुख कारण:

1. कचरा प्रबंधन में सुधार और जागरूकता अभियान:

सागर नगर निगम ने शहर के ब्लैक और रेड स्पॉट्स को चिन्हित कर वहां नियमित रूप से कचरा निस्तारण, सफाई और निगरानी का कार्य किया।
नगर निगम की गाड़ियों के माध्यम से घर-घर से सूखा और गीला कचरा एकत्रित किया गया और लोगों को भी जागरूक किया गया कि वे कचरा सड़क पर न फेंकें, बल्कि निर्धारित स्थानों पर ही दें।

2. मटका खाद योजना का प्रभाव:

लोगों को अपने घरों में मटका खाद तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया। इससे न केवल जैविक कचरे का पुनर्चक्रण हुआ, बल्कि लोगों में कचरा पृथक्करण की जागरूकता भी बढ़ी। यह पहल स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सराहनीय रही।

3. सड़क और चौराहों का विकास व सौंदर्यीकरण:

नगर निगम द्वारा उन इलाकों में नई सड़कों और चौराहों का निर्माण किया गया, जो पहले गंदगी और कीचड़ के लिए कुख्यात थे। इसके अलावा, कई स्थानों पर सौंदर्यीकरण कार्य किए गए, जैसे दीवारों पर पेंटिंग, गार्डनिंग और लाइटिंग इत्यादि।

4. 48 वार्डों में नियमित साफ-सफाई:

सागर के सभी 48 वार्डों में नगर निगम की सफाई टीमों ने लगातार कार्य किया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वार्ड पार्षदों ने भी अपने क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था पर सतत निगरानी रखी।

5. शौचालयों की नियमित सफाई और सुविधा सुधार:

सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई और मरम्मत कराई गई। कई स्थानों पर नए शौचालयों का निर्माण भी किया गया। इससे ओडीएफ (Open Defecation Free) स्थिति को बनाए रखना संभव हो सका।


प्रमुख उपलब्धि: वाटर प्लस प्रमाणन

महापौर संगीता तिवारी के अनुसार, सागर को स्वच्छता में 10वीं रैंक दिलाने में वाटर प्लस सर्टिफिकेशन की अहम भूमिका रही।
रेलवे की भूमि से सीवर लाइन बिछाने की अनुमति कई वर्षों से लंबित थी, जिसे नगर निगम ने विशेष प्रयास कर मंजूरी दिलवाई और प्रोजेक्ट को समय पर पूरा किया। यदि यह कार्य नहीं होता, तो वाटर प्लस की उपलब्धि अधूरी रह जाती।


नागरिक फीडबैक और भागीदारी:

शहरवासियों ने स्वच्छता के लिए सकारात्मक फीडबैक दिया और नगर निगम के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी की। विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्कूलों, स्वयंसेवकों और स्थानीय निवासियों ने स्वच्छता रैलियों, जन जागरूकता कार्यक्रमों, और स्वच्छता रैंकिंग फीडबैक में योगदान दिया।


हरियाली और पर्यावरण संरक्षण:

सागर नगर निगम ने पौधारोपण अभियान भी चलाया। कई सार्वजनिक स्थानों, पार्कों और मुख्य सड़कों के किनारे पेड़ लगाए गए, जिससे शहर की हरियाली में वृद्धि हुई और पर्यावरण भी स्वच्छ हुआ

सागर नगर निगम की यह सफलता दिखाती है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, जनभागीदारी और सुनियोजित रणनीति एक साथ मिलती हैं, तो किसी भी शहर को स्वच्छता की मिसाल बनाया जा सकता है। सागर ने सिर्फ रैंक नहीं बढ़ाई है, बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !

संवाददाता – अर्पित सेन
7806077338, 9109619237

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