नटवरलाल का नाम आपने सुना होगा — संसद बेच दी, ताजमहल बेच डाला। लेकिन अगर आप सोचते हैं कि ठगी की यह विरासत वहीं खत्म हो गई, तो जरा रुकिए। क्योंकि इस कहानी में ऐसा शातिर ठग है जिसने न सिर्फ एक देश, बल्कि पूरी दुनिया को ठग डाला। वो भी महज एक सिलिकॉन
गाजियाबाद से निकली याद और दुनिया तक पहुंची ठगी
हाल ही में गाजियाबाद से एक फर्जी दूतावास चलाने वाले ठग की खबर सामने आई, जिसने नक्शे पर मौजूद न होने वाले देशों के नाम पर ठगी की। लेकिन इस घटना ने ध्यान खींचा गिल्बर्ट चिकली की ओर — ऐसा नाम, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठगी की परिभाषा ही बदल दी।

गिल्बर्ट चिकली कौन है?
एक साधारण सा चेहरा, लेकिन दिमाग शातिरों का बेताज बादशाह। चिकली ने फ्रांस के रक्षा मंत्री जीन वेस ली-ड्रायन का सिलिकॉन मास्क बनवाया। और फिर उसने एक गैंग बनाया जो वीडियो कॉल पर रक्षा मंत्री बनकर करोड़ों की ठगी करता।
कैसे होता था खेल?
- पहला कदम – विश्वास का जाल:
गैंग का एक सदस्य खुद को मंत्री का करीबी बताकर संपर्क करता। फिर सामने वाले को यकीन दिलाता कि उसे फ्रांस के रक्षा मंत्री से बात कराई जाएगी। - दूसरा कदम – वीडियो कॉल धोखा:
वीडियो कॉल में चिकली सिलिकॉन मास्क पहनकर मंत्री बन जाता, बैकग्राउंड में झंडे, फोटो, और मंत्री कार्यालय की हूबहू नकल।
खराब इंटरनेट और धुंधली क्वालिटी का बहाना, ताकि पहचान न हो सके। - तीसरा कदम – डील का ड्रामा:
- “किडनैप हुए नागरिकों को छुड़ाना है”
- “हथियार खरीदने के लिए रकम चाहिए”
- “गोपनीय मिशन है, सरकार का समर्थन है”
ऐसे बहानों से बड़े-बड़े नेताओं और कारोबारी संस्थाओं से रकम वसूली जाती।
शिकार कौन-कौन बना?
- बेल्जियम के किंग फिलिप
- गैबॉन के राष्ट्रपति अली बोंगो
- इस्लामिक लीडर आगा खान
- तुर्की के अरबपति इनान किराक
- बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां
यह सभी लोग चिकली की फर्जी पहचान और वीडियो कॉल से प्रभावित होकर बड़ी रकम ट्रांसफर कर चुके थे।
जब चोरी पकड़ी गई
हर अपराधी की सबसे बड़ी कमजोरी होती है – ओवरकॉन्फिडेंस।
चिकली ने एक दिन कॉल किया सेनेगल के राष्ट्रपति मैकी सैल को। उसने औपचारिक फ्रांसीसी भाषा में बात शुरू की। लेकिन गलती ये हो गई कि सैल और ली-ड्रायन निजी दोस्त थे और आपस में बेहद अनौपचारिक भाषा में बात करते थे।
“ये ली-ड्रायन नहीं हो सकता!”
राष्ट्रपति सैल ने संदेह जताया और जांच के आदेश दे दिए। यहीं से गिल्बर्ट चिकली की पोल खुल गई।
भागकर पहुंचा इजरायल, लेकिन बचा नहीं
फ्रांस से भागकर गिल्बर्ट इजरायल चला गया, क्योंकि इजरायल और फ्रांस के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं थी।
वहां रहकर फिर से नई ठगी की योजना में जुट गया — इस बार मोनाको के प्रिंस का चेहरा पहनने की तैयारी।
गिरफ्तारी और सजा
2017 में जब वह यूक्रेन गया, वहीं से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
यूक्रेन और फ्रांस में प्रत्यर्पण समझौता था।
2020 में उसे 11 साल की सजा सुनाई गई।
नेटफ्लिक्स पर बनी डॉक्यूमेंट्री
गिल्बर्ट की शातिर ठगी और मास्क वाले खेल पर बनी डॉक्यूमेंट्री का नाम है —
“The Masked Scammer”
जो नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है।
यह डॉक्यूमेंट्री बताती है कि कैसे आधुनिक तकनीक और मानव मनोविज्ञान को हथियार बनाकर भी अपराध किए जा सकते हैं।
अपराध का ग्लोबल चेहरा
गिल्बर्ट चिकली सिर्फ एक ठग नहीं था, वह क्राइम साइकोलॉजी का चलता-फिरता उदाहरण था।
जहां ठगी अब नकली दस्तावेज़ों से नहीं, बल्कि
आर्टिफिशियल आइडेंटिटी, सोशल इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के सहारे होती है।