कहते हैं कि अगर कोई सपना दिल से देखा जाए और उसे पूरा करने की जिद हो, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं। इसी जिद और जुनून की मिसाल बनकर उभरे हैं सागर जिले के बण्डा नगर निवासी डॉ. सजल जैन, जिनका जीवन आज चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में समर्पण और प्रेरणा का प्रतीक बन गया है। उन्होंने न केवल अपने बचपन के डॉक्टर बनने के सपने को साकार किया, बल्कि अपने दादा और पिता की सेवा भावना को भी नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

तीन पीढ़ियों की डॉक्टर परंपरा
डॉ. सजल जैन का परिवार चिकित्सा क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम रहा है। उनके दादा डॉ. पूर्णचंद्र जैन बण्डा नगर के प्रथम चिकित्सकों में शामिल थे, जो अपने दौर में निःस्वार्थ सेवा, दयालुता और मरीजों के साथ आत्मीय संबंध के लिए जाने जाते थे। उनके पिता स्व. विजय कुमार जैन भी चिकित्सा को सेवा का माध्यम मानते थे और हमेशा गरीबों व असहायों की मदद को तत्पर रहते थे। उन्हीं की सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए डॉ. सजल जैन ने अपने कर्तव्यों में मरीजों के लिए संवेदनशीलता और समर्पण को प्राथमिकता दी है। वे आज भी उन मरीजों का निशुल्क इलाज करते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उनके अनुसार, “डॉक्टर का धर्म है कि वह पहले मरीज को ठीक करे, पैसे बाद में देखें।”
बचपन से था डॉक्टर बनने का सपना
डॉ. सजल जैन ने बचपन से ही घर के माहौल में चिकित्सा सेवा का जो संस्कार पाया, वही उनके जीवन का लक्ष्य बन गया। उन्होंने 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई कृष्णा पब्लिक स्कूल, भिलाई से की, फिर 12वीं की शिक्षा इमैनुएल इंग्लिश स्कूल, सागर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर से एमबीबीएस कर अपने डॉक्टर बनने के सपने को साकार किया।

शैक्षणिक सफलता के बाद डॉ. सजल ने बण्डा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में बतौर चिकित्सा अधिकारी सेवा दी। यहाँ उन्होंने न केवल अपने चिकित्सकीय कौशल से मरीजों का इलाज किया, बल्कि उनकी तकलीफ को समझकर भावनात्मक सहयोग भी दिया। यही वजह है कि वे आज मरीजों और क्षेत्रवासियों के बीच एक विश्वसनीय नाम बन चुके हैं।
सेवा भावना से ओतप्रोत व्यक्तित्व
डॉ. सजल न सिर्फ एक कुशल चिकित्सक हैं, बल्कि एक अनुशासित, विनम्र और संवेदनशील इंसान भी हैं। वे हर मरीज को एक इंसान के रूप में देखते हैं, न कि एक ‘केस’ के रूप में। उनका मानना है कि बीमारी का इलाज दवा से ज्यादा आत्मीयता और भरोसे से होता है। उनके सटीक निदान और सरल व्यवहार ने उन्हें हजारों मरीजों का प्रिय बना दिया है। वे कहते हैं, “मुझे डॉक्टर बनाने में मेरे दादा और पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। उनकी सेवा भावना ही मेरी प्रेरणा है।”
सेवा का पारिवारिक समर्पण
चिकित्सा सेवा डॉ. सजल जैन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके छोटे भाई डॉ. अचिंत्य जैन और बहन डॉ. हर्षिता जैन भी इसी राह पर अग्रसर हैं। डॉ. अचिंत्य वर्तमान में सिविल अस्पताल, बण्डा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वहीं डॉ. हर्षिता भी चिकित्सा जगत में सक्रिय हैं और समाज की सेवा को ही अपना धर्म मानती हैं। तीनों भाई-बहनों का डॉक्टर होना और चिकित्सा सेवा में योगदान देना, न केवल परिवार के लिए, बल्कि पूरे बण्डा नगर के लिए गर्व की बात है।
बण्डा नगर का गौरव और प्रेरणा
बण्डा नगर और आसपास के क्षेत्रवासियों के लिए यह अत्यंत गौरव की बात है कि एक ऐसा परिवार जो पीढ़ियों से चिकित्सा सेवा में जुटा है, आज भी उसी निष्ठा और समर्पण से समाज की सेवा कर रहा है। डॉ. सजल जैन आज क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गए हैं। लोग उन्हें केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि “नवयुग के प्रेरक आदर्श” के रूप में देखते हैं।
शुभकामनाएं और सम्मान
डॉ. सजल जैन को उनकी सेवा भावना, मानवता और चिकित्सकीय समर्पण के लिए क्षेत्रवासियों की ओर से ढेरों शुभकामनाएं मिल रही हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि वे आने वाले वर्षों में चिकित्सा क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और सेवा से नई ऊँचाइयाँ हासिल करेंगे और अपने परिवार की समृद्ध परंपरा को पूरे सम्मान के साथ आगे बढ़ाएंगे।