कभी-कभी एक साधारण सी शुरुआत, असाधारण उपलब्धियों की ओर ले जाती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है बुंदेलखंड के सागर जिले की बेटी शानवी शर्मा की, जो न केवल पढ़ाई में अव्वल हैं, बल्कि सह-शैक्षणिक गतिविधियों और सामाजिक सेवा में भी अग्रणी हैं। पीएमसी केंद्रीय विद्यालय ढाना में कक्षा 11वीं की छात्रा शानवी, हाल ही में स्काउट गाइड राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित हुई हैं और अब उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।

विशेष कैंप में उत्कृष्ट प्रदर्शन
यह सम्मान शानवी को कटनी में आयोजित एक सप्ताह के विशेष कैंप में उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए मिला। इस कैंप में छात्रों का मूल्यांकन कई आयामों पर किया गया—जैसे यूनिफॉर्म की साफ-सफाई, लकड़ी और रस्सी से वस्तुएँ बनाना, अनुशासन, टीमवर्क, सेवा भावना और नेतृत्व क्षमता। शानवी ने हर क्षेत्र में न केवल श्रेष्ठता दिखाई, बल्कि कठिन समय में दूसरों की मदद कर ‘लीडर विद हार्ट’ की पहचान भी बनाई।

तीसरी कक्षा से स्काउट गाइड से जुड़ीं
शानवी का स्काउट गाइड से जुड़ाव कोई नया नहीं है। उन्होंने महज तीसरी कक्षा में स्काउट गाइड की गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया था और अब छह वर्षों से इस संगठन की सक्रिय सदस्य रही हैं। इस दौरान उन्होंने ट्रैकिंग, पेट्रोलिंग, प्राथमिक उपचार, रस्सियों से निर्माण कार्य, आपदा प्रबंधन जैसी कई जीवनोपयोगी तकनीकें सीखी हैं। शानवी मानती हैं कि स्काउट गाइड ने उन्हें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की गहरी समझ दी है। उनके अनुसार, “स्काउट गाइड सिर्फ एक गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सीख है।”
बहुआयामी प्रतिभा की धनी
शानवी केवल स्काउट गाइड तक ही सीमित नहीं हैं। वह पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं। हाल ही में “एक भारत श्रेष्ठ भारत” अभियान के तहत नागालैंड राज्य के पारंपरिक गीत की प्रस्तुति दी, जिसमें उनके विद्यालय ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा वह ‘कला उत्सव’, नृत्य, वाद्य वादन और भाषण प्रतियोगिताओं में भी विद्यालय का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
संगीत में शानवी की विशेष रुचि है। वह हारमोनियम, तबला और ढोलक जैसे वाद्य यंत्रों में निपुण हैं। हाल ही में विद्यालय में आयोजित “बधाई डांस प्रतियोगिता” में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
समाजसेवा का सपना और उद्देश्य
शानवी का सपना है कि वह भविष्य में एक कुशल डॉक्टर बनें और समाज की सेवा करें। उनका कहना है कि “एक अच्छा इंसान बनना ही किसी भी सफलता की पहली सीढ़ी है।” उनकी सोच में परिपक्वता, उनके स्वभाव में विनम्रता और उनके कर्म में अनुशासन झलकता है। डॉक्टर बनना सिर्फ एक करियर विकल्प नहीं, बल्कि उनके लिए एक सामाजिक जिम्मेदारी का जरिया है।
विद्यालय और क्षेत्र का गौरव
शानवी की उपलब्धियाँ केवल उनके परिवार या विद्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने सागर और संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र का नाम रोशन किया है। स्कूल के शिक्षक, प्रधानाचार्य और सहपाठी गर्व से कहते हैं कि “शानवी जैसी छात्राएं समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत होती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि संसाधनों की सीमाएं कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं, अगर नीयत साफ हो और मेहनत सच्ची हो।”
राष्ट्रपति पुरस्कार की उम्मीद
राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए नामित होना शानवी के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम का प्रमाण है, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा भी है जो छोटे शहरों या सीमित संसाधनों में रहते हुए बड़े सपने देखती हैं। अगर सब कुछ अनुकूल रहा, तो आने वाले महीनों में शानवी शर्मा को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होते हुए देखना पूरे सागर जिले के लिए गर्व का क्षण होगा।