मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र इन दिनों गर्माया हुआ है, और जब बात किसानों की हो तो आवाजें और भी बुलंद हो जाती हैं। पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने किसानों की टूटती उम्मीदों, चौपट होती फसलों और खेतों में पसरे सन्नाटे को लेकर शून्यकाल में प्रदेश सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।

📍 15 दिनों की बारिश, बरबादी की तस्वीर
खुरई और मालथौन तहसीलों में पिछले 15 दिनों में लगातार हुई अतिवृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जिन खेतों में हरे-भरे सपने बोए गए थे, वहां अब कीचड़, जलभराव और सड़ती हुई फसलें हैं। खासकर सोयाबीन, उड़द और मक्का जैसी खरीफ फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।
पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने इस प्राकृतिक आपदा को सदन में पुरजोर तरीके से रखते हुए कहा:
“माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से आग्रह है कि खुरई विधानसभा क्षेत्र में हुए फसलों के नुकसान का तुरंत सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को राहत राशि स्वीकृत की जाए। इस समय खेतों में कुछ नहीं बचा, किसान बेहद निराश हैं।”
📜 मुख्य सचिव को भेजा गया पत्र
29 जुलाई 2025 को श्री भूपेन्द्र सिंह ने मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन को एक पत्र भेजकर इस आपदा की गंभीरता से अवगत कराया था। पत्र में उन्होंने लिखा:
“तहसील खुरई एवं मालथौन के कृषकों और जनप्रतिनिधियों ने जानकारी दी है कि लगातार अतिवर्षा के कारण फसलें सड़ गई हैं। किसानों की मेहनत और निवेश दोनों बर्बाद हो गया है। सर्वे कराकर मुआवजा और फसल बीमा की सुविधा देने हेतु तुरंत कार्रवाई की जाए।”
उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि उपज की संभावना अब नगण्य है, यानी किसानों के पास ना फसल है, ना आय, और ना ही आगामी कृषि सत्र के लिए संसाधन।

👨🌾 किसान हैं हताश, सरकारी मदद की आस
क्षेत्रीय किसानों से जब संवाद किया गया तो उनमें गहरा आक्रोश और निराशा दिखाई दी। खुरई के ग्राम बरोदिया के किसान रमेश लोधी ने कहा:
“4 एकड़ में सोयाबीन बोया था, पूरा जलभराव में सड़ गया। बीज, खाद, मजदूरी सब मिलाकर 40 हजार लगे थे। अब घर कैसे चलेगा?”
इसी तरह मालथौन के किसान रामस्वरूप कुशवाहा बोले:
“हर बार किसान ही मारा जाता है। फसल खराब होती है तो सर्वे ही नहीं होता। फसल बीमा का पैसा कटता है, पर क्लेम नहीं मिलता।”
🏛️ सदन में सधी हुई आवाज, सीधा अनुरोध
श्री भूपेन्द्र सिंह ने सदन में स्पष्ट शब्दों में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया:
“आपके माध्यम से निवेदन करता हूं कि सर्वे के आदेश तुरंत दिए जाएं। जहां भी नुकसान हुआ है, वहां सर्वे के आधार पर राहत राशि स्वीकृत की जाए। इससे किसानों को मानसिक राहत और आर्थिक सहारा मिलेगा।”
साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया कि फसल बीमा योजना के अंतर्गत अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जाए, और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
📈 विधानसभा में गूंजा किसानों का दर्द
पूर्व गृहमंत्री की इस पहल को अन्य विधायकों ने भी समर्थन दिया। कुछ ने सुझाव दिया कि केवल खुरई ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के प्रभावित जिलों में अतिवृष्टि से हुई क्षति का तत्काल मूल्यांकन होना चाहिए।
🔍 प्रशासन को दिए गए निर्देश – कार्रवाई की उम्मीद
इस मुद्दे के उठाए जाने के बाद खबर है कि सागर जिला प्रशासन ने भी इस पर गंभीरता दिखाई है। कृषि विभाग और तहसील स्तर पर सर्वे टीमें गठित करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। यदि सरकार शीघ्रता से निर्णय लेती है तो खरीफ संकट से जूझ रहे हजारों किसानों को राहत मिल सकती है।
📌 निष्कर्ष: अब फैसले की घड़ी
पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने न केवल अपने क्षेत्र की चिंता जताई, बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए एक संवेदनशील उदाहरण प्रस्तुत किया है। मानसून की मार सह रहे किसानों को अब सिर्फ सर्वे नहीं, न्याय और मुआवजा चाहिए। और ये तभी संभव है जब शासन संवेदनशील हो, प्रशासन सक्रिय हो और नीति स्पष्ट हो।