जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, 370 हटाने के ऐतिहासिक फैसले के साक्षी रहे थे !

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देश की राजनीति में एक अहम और बेबाक आवाज़ आज हमेशा के लिए खामोश हो गई। जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल और देश के वरिष्ठ राजनेता सत्यपाल मलिक का मंगलवार को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे और लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने दोपहर 1:20 बजे अंतिम सांस ली।

सत्यपाल मलिक को 11 मई 2025 को तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो पाया और अंततः आज उनका निधन हो गया।


राजनीति में एक लंबा और विविधतापूर्ण सफर

सत्यपाल मलिक का जीवन भारतीय राजनीति में कई मोड़ों और विचारधाराओं से होकर गुजरा। उन्होंने सांसद, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, और राजनीतिक चिंतक के तौर पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। सत्यपाल मलिक को उनके स्पष्ट और बेबाक बयानों के लिए जाना जाता था।

वे देश के गवर्नर के रूप में चार राज्योंबिहार, जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय में अपनी सेवाएं दे चुके थे। लेकिन उनका सबसे चर्चित कार्यकाल रहा जम्मू-कश्मीर में, जहां उन्होंने एक बेहद ऐतिहासिक और संवेदनशील समय में राज्य की बागडोर संभाली।


5 अगस्त 2019 – इतिहास की गवाही देने वाला दिन

आज ही का दिन – 5 अगस्त – सत्यपाल मलिक के जीवन का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ था। साल 2019 में इसी तारीख को अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला केंद्र सरकार द्वारा लिया गया था। सत्यपाल मलिक उस समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। केंद्र द्वारा लिए गए निर्णय के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया।

यह फैसला भारत के संविधान, राजनीति और संघीय ढांचे के इतिहास में एक अभूतपूर्व परिवर्तन माना गया। सत्यपाल मलिक ने उस समय न केवल प्रशासनिक मोर्चे पर इस फैसले को लागू करवाया, बल्कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान राजनीतिक शांति और स्थायित्व बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


राजनीतिक जीवन और विचारधारा

सत्यपाल मलिक का राजनीतिक करियर विभिन्न दलों से होते हुए एक विचारशील राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभरा। उन्होंने कांग्रेस, जनता दल, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी – सभी के साथ काम किया। वर्ष 1989 में वे राज्यसभा सदस्य बने और बाद में लोकसभा सांसद भी रहे।

भाजपा में शामिल होने के बाद वे 2017 में बिहार के राज्यपाल बनाए गए। इसके बाद उन्हें जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया, जो उनके राजनीतिक जीवन की सबसे अहम जिम्मेदारी बनी।


विवादों और बेबाक बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहे

सत्यपाल मलिक का नाम हमेशा बेबाक राय के लिए जाना गया। उन्होंने कई बार सरकार की नीतियों, नौकरशाही और भ्रष्टाचार पर खुलकर आलोचना की। पुलवामा हमले को लेकर दिए गए उनके बयानों ने कई बार सरकार को असहज भी किया।

वे किसानों के समर्थन में भी लगातार आवाज उठाते रहे। खासकर 2020-21 के कृषि कानूनों के विरोध के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए किसानों के पक्ष में कई बयान दिए, जिससे वे चर्चा में बने रहे।

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