रक्षाबंधन से पहले मिली सौगात, सुनीता मिश्रा की आंखों में छलकी खुशियां !

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रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इस साल यह त्योहार प्रदेश की लाखों बहनों के लिए और भी खास बन गया है, क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा ‘‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’’ के तहत मिलने वाली मासिक सहायता राशि के अतिरिक्त 250 रुपये का रक्षाबंधन सगुन भी प्रदान किया गया है। यह सगुन न सिर्फ एक आर्थिक सहयोग है, बल्कि एक भाई के प्रेम का सजीव प्रतीक बनकर उभरा है।

सागर जिले के वल्लभ नगर वार्ड निवासी श्रीमती सुनीता मिश्रा इस योजना की हितग्राही हैं। सुनीता की मुस्कान इस बात की गवाही देती है कि उन्हें रक्षाबंधन से ठीक पहले यह सहायता राशि प्राप्त हुई, जिससे उनका त्योहार और भी उल्लासमय हो गया है। वे कहती हैं, “मुख्यमंत्री जी का यह सगुन सिर्फ 250 रुपये नहीं, बल्कि उस भाई की तरह है जो अपनी बहन को त्योहार पर प्यार और सम्मान देना नहीं भूलता।”

सुनीता बताती हैं कि पहले रक्षाबंधन जैसे त्योहार उनके लिए चिंता का कारण बनते थे। मिठाई, राखी और छोटे-मोटे तोहफों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे खुद अपने खर्चों को सँभाल पा रही हैं। इस बार वह 250 रुपये के सगुन से राखी, रुमाल और मिठाई खरीदकर पर्व को पूरे हर्षोल्लास से मनाने की तैयारी में हैं।

उन्होंने कहा, “पहले त्योहारों में दूसरों से उधार मांगना पड़ता था, लेकिन अब मुझे किसी के आगे हाथ फैलाने की ज़रूरत नहीं है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मुझे आत्मनिर्भर बना दिया है।” वे कहती हैं कि यह योजना न केवल आर्थिक रूप से सहायता करती है, बल्कि महिलाओं को यह एहसास भी कराती है कि सरकार उनके साथ खड़ी है, एक भाई की तरह उनका हाथ थामे हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति उन्होंने गहरा आभार व्यक्त किया और कहा कि मुख्यमंत्री ने बहनों की भावनाओं को समझते हुए बहुत संवेदनशील निर्णय लिया है। यह योजना केवल पैसे नहीं देती, बल्कि समाज में महिलाओं को सम्मान और आत्मगौरव भी प्रदान करती है।

सुनीता मिश्रा की यह कहानी उन हजारों बहनों की दास्तां का प्रतिनिधित्व करती है, जो इस योजना से जुड़कर अपने जीवन में नया आत्मविश्वास, नया उत्साह और एक नई दिशा पा रही हैं। यह सगुन रक्षाबंधन के त्योहार को केवल पारंपरिक नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन और महिला सशक्तिकरण का उत्सव भी बना रहा है।

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो जनकल्याण की योजनाएं सीधे हृदय को छू सकती हैं। रक्षाबंधन जैसे भावनात्मक पर्व पर मिला यह सगुन हर बहन के चेहरे पर मुस्कान और हृदय में भरोसा भर रहा है — एक भाई अब सरकार में भी है!

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