
सागर: सागर जिले में जिला पंचायत सीईओ विवेक केवी और जिला पंचायत सदस्य ज्योति पटेल के बीच हुई कथित अभद्रता का मामला गहराता जा रहा है। इस प्रकरण में राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है मामला?
जिला पंचायत सदस्य ज्योति पटेल ने आरोप लगाया है कि उन्होंने क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर सीईओ विवेक केवी से चर्चा करनी चाही, लेकिन अधिकारी का रवैया निराशाजनक और अपमानजनक रहा।
27 नवंबर को जब ज्योति पटेल ने जिला पंचायत कार्यालय में सीईओ से मुलाकात की कोशिश की, तो उन्हें मीटिंग का बहाना देकर टालने की कोशिश की गई। जब वे दोबारा उनके कार्यालय गईं, तो सीईओ ने कथित तौर पर उन्हें बाहर निकलने को कहा और चैंबर का दरवाजा बंद कर लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने कर्मचारियों को दरवाजा न खोलने का निर्देश दिया।

दिग्विजय सिंह का पत्र
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कहा कि इस घटना से न केवल जनप्रतिनिधि का अपमान हुआ है, बल्कि यह नौकरशाही के अनुशासनहीन और स्वेच्छाचारी रवैये को भी उजागर करता है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि ज्योति पटेल एक जागरूक महिला जनप्रतिनिधि हैं, जो दो बार जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हो चुकी हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि यह मामला सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है और विवेक केवी के खिलाफ सिविल सेवा अधिनियम 1965 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
पिछड़े वर्ग की प्रतिनिधि पर अभद्रता का आरोप
ज्योति पटेल, जो पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखती हैं, ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि को इस तरह अपमानित करना न केवल उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह समाज के प्रति प्रशासन के गैर-जिम्मेदार रवैये को दर्शाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस घटना को “प्रदेश में नौकरशाही का जनता और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपमानजनक रवैया” करार दिया है।

वीडियो साक्ष्य और मांग
ज्योति पटेल ने इस घटना का वीडियो प्रमाण के तौर पर मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में संलग्न किया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह प्रकरण दलगत राजनीति से ऊपर है और इसमें त्वरित न्याय आवश्यक है।
सीईओ विवेक केवी का पक्ष
फिलहाल, सीईओ विवेक केवी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वे 2020 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के युवा अधिकारी हैं और अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
घटनाक्रम पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मामले में प्रदेश सरकार की प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री का रुख अहम होगा। जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच इस तरह का टकराव न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस प्रकरण में क्या कदम उठाती है। क्या यह मामला न्यायिक जांच की ओर बढ़ेगा, या प्रशासनिक स्तर पर समाधान खोजा जाएगा? फिलहाल, यह विवाद सागर में चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।
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