भोपाल, 07 सितंबर 2025: विदिशा जिले में सम्राट अशोक सागर परियोजना के तहत बने हलाली डैम के जलस्तर में वृद्धि के कारण भोपाल जिले के 16 से अधिक गांवों की लगभग 1000 एकड़ कृषि भूमि डूब गई है। खेतों में 2 से 3 फीट तक पानी भरने से धान और सोयाबीन जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। इससे आक्रोशित किसानों ने पानी में उतरकर आंदोलन शुरू कर दिया है और सरकार से तत्काल मुआवजे की मांग की है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट भी किसानों के समर्थन में पानी में उतरे और उन्हें मुआवजे का भरोसा दिलाया।

डैम का जलस्तर और समस्या की जड़
हलाली डैम का निर्माण 1976-77 में हुआ था, और तब से इसकी जल निकासी 1508 फीट की ऊंचाई पर बने बेस्ट बेयर के माध्यम से होती थी। हालांकि, पिछले दो वर्षों में जल निकासी को नियंत्रित करने के लिए गेट लगाए गए हैं, ताकि जलस्तर 1508 फीट से ऊपर न जाए। लेकिन वर्तमान में डैम का जलस्तर 1510 फीट तक पहुंच गया है, जिसके कारण अतिरिक्त 2 फीट पानी ने भोपाल जिले के 16 गांवों की कृषि भूमि को प्रभावित किया है। इससे सैकड़ों किसानों की हजारों एकड़ जमीन पर खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं।
प्रभावित गांव और फसलें
जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट ने बताया कि डैम के पानी से करोंद खुर्द, मोहनपुर, कडै़य्या, चिलखेड़ा, पिपरिया झुन्नारदार, बुदोर, छत्री, भैंसखेड़ा, और रोंझिया जैसे गांवों की फसलें प्रभावित हुई हैं। मुख्य रूप से धान और सोयाबीन की फसलें पानी में डूबकर नष्ट हो गई हैं। पिछले पांच से छह दिनों से खेतों में पानी भरा हुआ है, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

किसानों का आंदोलन और मांग
पानी में डूबी फसलों को देखकर किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। वे डैम के पानी में उतरकर विरोध जता रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि सरकार तत्काल फसलों के नुकसान का सर्वे कराए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा प्रदान करे। किसानों का कहना है कि जलस्तर को 1508 फीट से ऊपर बढ़ने देने का कोई औचित्य नहीं है, और गेट लगाने का उद्देश्य भी विफल साबित हुआ है।
जिपं उपाध्यक्ष का बयान
मोहन सिंह जाट ने कहा, “पिछले पांच से छह दिनों से खेतों में पानी भरा हुआ है। गेट खोलने से पानी की निकासी तो हो रही है, लेकिन खेतों में अभी भी काफी पानी जमा है। यह किसानों के लिए एक जटिल समस्या बन गई है। सरकार को तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि डैम के जलस्तर को स्थिर रखने में असफलता के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों की शिकायत: गेटों का क्या फायदा?
किसानों ने सवाल उठाया है कि जब जलस्तर को नियंत्रित नहीं किया जा सका, तो गेट लगाने का क्या लाभ? उनका कहना है कि डैम का जलस्तर 1508 फीट से अधिक नहीं होना चाहिए था। इसके बावजूद, अतिरिक्त जलस्तर के कारण उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का सटीक आकलन कर मुआवजा प्रदान किया जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिपं उपाध्यक्ष जाट ने प्रशासन से किसानों के हित में त्वरित कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रभावित किसानों के लिए एक ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन किसानों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।
निष्कर्ष
हलाली डैम के जलस्तर में वृद्धि ने भोपाल जिले के किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। प्रभावित किसानों की मांग है कि सरकार उनकी बर्बाद फसलों का सर्वे कराए और शीघ्र मुआवजा प्रदान करे। यह घटना जल प्रबंधन और बांध संचालन में बेहतर समन्वय की आवश्यकता को दर्शाती है, ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह के नुकसान से बचाया जा सके।