मध्य प्रदेश के सागर शहर में पत्रकारिता के नाम पर एक गंभीर अपराध का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। कथित पत्रकार शिवम दत्त तिवारी और उसके साथियों द्वारा अधिकारियों व आम नागरिकों को ब्लैकमेल करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। अब तक तीन प्रमुख शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें एक सरकारी अधिकारी भी शामिल है। पीड़ितों की प्रताड़ना इतनी बढ़ गई कि एक ने थाने में आत्मदाह का प्रयास किया, तो दूसरे ने एसपी कार्यालय में चेतावनी दी। ताजा मामला तो और भी चौंकाने वाला है—इंदौर की एक कार रेंटल कंपनी की 15 लाख रुपये की महिंद्रा थार जीप रहस्यमयी ढंग से गायब हो गई। जब स्थानीय पत्रकार अमित मिश्रा ने इसकी रिपोर्टिंग की, तो उन्हें जान से मारने की धमकी तक मिली।
सागर पुलिस के अनुसार, शिवम दत्त तिवारी खुद को एक रीजनल न्यूज चैनल का संवाददाता बताता है। पिछले कई महीनों से शहर में इनकी ब्लैकमेलिंग की चर्चा जोरों पर है। खबरें चलाने की धमकी देकर ये लोग पैसे वसूल रहे हैं। पुलिस को अब तक दर्जनों शिकायतें मिल चुकी हैं, और जांच तेज हो गई है।
पहला मामला: अश्लील वीडियो और 10 लाख की फिरौती
सागर के मोतीनगर थाने में महिला बबीता राजपूत की शिकायत पर शिवम दत्त तिवारी समेत उसके चार साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने उसका अश्लील वीडियो बनाया और उसके पति को ‘फर्जी डॉक्टर’ बताकर लोगों को ठगने की खबर चलाने की धमकी दी। इसके बहाने 10 लाख रुपये की मांग की गई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है।
दूसरा मामला: होटल व्यवसायी का आत्मदाह प्रयास
शहर के होटल व्यवसायी आदर्श जैन को धोखे से मोबाइल में निजी तस्वीरें डालकर प्रताड़ित किया गया। कथित पत्रकारों ने 2 लाख रुपये की मांग की। परेशान होकर पीड़ित थाने पहुंचा और केरोसिन डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने साथी के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह घटना पत्रकारिता के दुरुपयोग का जीता-जागता उदाहरण है, जहां इंसानी जिंदगी दांव पर लग रही है।
तीसरा मामला: सराफा व्यापारी की एसपी को शिकायत
सराफा व्यापारी सूर्याश जड़िया को भी खबर चलाने के नाम पर ब्लैकमेल किया गया। पीड़ित ने एसपी कार्यालय में शिकायती आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया पर पीड़ित का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वह अपनी पूरी आपबीती बयां कर रहा है। यह मामला शहर में सनसनी फैला रहा है।
चौथा मामला: सरकारी अधिकारी का वीडियो ब्लैकमेल
पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री एच.के. कश्यप को सबसे शर्मनाक तरीके से फंसाया गया। शिवम दत्त तिवारी और उसके साथी अधिकारी से मिलने के बहाने दफ्तर पहुंचे। नकारात्मक बातें करवाकर उनका वीडियो चोरी-छिपे रिकॉर्ड किया। फिर उसी वीडियो के आधार पर लाखों रुपये नगद और दो ब्रांडेड महंगे मोबाइल फोन की मांग की। न देने पर खबर चलाने और छवि बर्बाद करने की धमकी दी। डरकर अधिकारी ने कुछ पैसे दे भी दिए, लेकिन लालच बढ़ता गया।
पीड़ित अधिकारी ने एसपी से लेकर थाने तक शिकायत दर्ज कराई। उनका बयान साफ है: “ये लोग पत्रकारिता के कवच का दुरुपयोग कर रहे हैं।” 10-12 दिन बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया, जिससे अधिकारी पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई हुई।
ताजा मामला: 15 लाख की महिंद्रा थार का गायब होना
इंदौर की टीएसजे कार्स रेंटल सर्विसेज को 15 लाख रुपये की महिंद्रा थार जीप के गायब होने से बड़ा झटका लगा। कंपनी मैनेजर विपिन सिंह ने शिवम दत्त तिवारी, उसके भाई शिवांश दत्त तिवारी और परिचित निमित दुबे पर धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगाया। 8 अगस्त 2025 को जीप राजेंद्र सिंह के नाम पर किराए पर दी गई (किराया अवधि: 8 अगस्त से 7 सितंबर, कुल 1 लाख रुपये)। भुगतान यूपीआई से हुआ—निमित दुबे ने 90 हजार और शिवांश ने 10 हजार दिए। लेकिन वास्तविक उपयोग शिवम कर रहा था। राजेंद्र सिंह (कंपनी के पुराने ग्राहक) का कहना है कि आपातकालीन स्थिति का हवाला देकर उनके नाम पर एग्रीमेंट करवाया गया।

जीप में लगा जीपीएस डिवाइस एक हफ्ते में ही डीएक्टिवेट हो गया। विपिन के संपर्क करने पर पता चला कि जीप शिवम के पास है। बहाने बनाए गए कि मकरोनिया मोटरिंग पॉइंट पर मैकेनिक योगेश पांडेय ने ठीक किया, लेकिन जीपीएस पूरे महीने एक्टिव नहीं रहा। आखिरी ट्रैकिंग 10 अगस्त को मकरोनिया के नारायण हॉस्पिटल के पास।
7 सितंबर को जीप न लौटने पर शिवम ने चोरी का दावा किया, लेकिन एफआईआर की कॉपी मांगने पर कोई सबूत नहीं। विपिन ने सागर के थानों में जांच की, लेकिन कोई रिपोर्ट नहीं मिली। मोतीनगर चौराहे पर मुलाकात में शिवम ने धमकी दी: “तुझे जो करना है कर ले, गाड़ी नहीं लौटाएंगे।” खुद को बड़ा पत्रकार बताते हुए गालियां दीं।
विपिन का आरोप है कि यह सुनियोजित साजिश थी—जीपीएस डीएक्टिवेट, झूठा चोरी दावा और धमकियां। राजेंद्र ने भी धोखा होने की पुष्टि की। कंपनी को 15 लाख का नुकसान। विपिन ने बीएनएस धाराओं के तहत एफआईआर और जीप बरामदगी की मांग की। उनके पास रेंट एग्रीमेंट, भुगतान रसीदें और जीपीएस रिकॉर्ड जैसे सबूत हैं।
क्या कहती है पुलिस?
सागर पुलिस ने सभी मामलों में कार्रवाई शुरू कर दी है। शिवम दत्त तिवारी, शिवांश और निमित दुबे के खिलाफ कड़ी जांच चल रही है। क्या यह जीप सागर की सड़कों पर गायब हो गई या बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा? शिवम का ‘पत्रकार’ दावा धमकियों का आधार है या सिर्फ ढाल? सवालों का जवाब जांच से ही मिलेगा।
पीड़ितों का संदेश: डरें नहीं, शिकायत करें
दर्जनों पीड़ित अभी डर के साए में जी रहे हैं। सागर की पत्रकारिता शर्मसार हो चुकी है। अगर आप भी इस गिरोह के शिकार हैं, तो बिना डरे पुलिस से संपर्क करें। अपडेट्स के लिए न्यूज पोर्टल पर बने रहें।