इंदौर में धीमी रफ्तार पर भड़के निगम कमिश्नर: भागीरथपुरा में सीवरेज, सड़क और नर्मदा लाइन कार्यों का सख्त निरीक्षण !

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इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हाल ही में हुए जल संकट के बाद नगर निगम प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। इसी कड़ी में नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने सोमवार को क्षेत्र का दौरा कर चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया और काम की धीमी रफ्तार पर कड़ी नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि लापरवाही अब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कमिश्नर सिंघल अधिकारियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने सीवरेज लाइन, सड़क निर्माण कार्य और नर्मदा जल प्रदाय परियोजना की प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि रेस्टोरेशन का कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है, जिस पर उन्होंने संबंधित एजेंसियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।

निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से कार्यों की मॉनिटरिंग करें और जहां भी देरी या लापरवाही दिखे, वहां तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र के लगभग 97 प्रतिशत हिस्से में पाइपलाइन के माध्यम से पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई है। शेष क्षेत्रों में कार्य तेजी से जारी है और जहां अभी पानी की सप्लाई पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है, वहां टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पर कमिश्नर ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में अभी भी समस्या है, वहां जल्द से जल्द स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

कमिश्नर सिंघल ने मौके पर मौजूद रहवासियों से भी बातचीत की और पानी की उपलब्धता को लेकर फीडबैक लिया। अधिकांश लोगों ने बताया कि अब स्थिति पहले से बेहतर है और पानी नियमित रूप से मिल रहा है। हालांकि कुछ स्थानों पर अभी भी सुधार की आवश्यकता बताई गई, जिस पर कमिश्नर ने तत्काल ध्यान देने के निर्देश दिए।

पानी की गुणवत्ता को लेकर भी निगम कमिश्नर ने विशेष सतर्कता बरती। उन्होंने मौके पर ही नर्मदा जल की क्लोरिनेशन सैंपलिंग करवाई, जिसमें पानी की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल सप्लाई के दौरान नियमित रूप से सैंपलिंग और क्लोरिनेशन प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिल सके।

यह निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सख्त संदेश भी था कि अब शहर में विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तय समयसीमा में कार्य पूरे नहीं करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

भागीरथपुरा जलकांड के बाद प्रशासन की सक्रियता यह दर्शाती है कि अब शहर में आधारभूत सुविधाओं को लेकर निगरानी और जवाबदेही बढ़ाई जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इन सख्त निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाई देता है और नागरिकों को राहत कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से मिलती है।

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