ई-चालानों का बढ़ता बोझ: छह लाख लंबित मामलों से जूझ रही अदालत, आम लोग हो रहे परेशान !

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Indore में ट्रैफिक पुलिस द्वारा बड़े पैमाने पर बनाए जा रहे ई-चालानों ने अब प्रशासन और न्याय व्यवस्था दोनों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। शहर में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के चलते लाखों चालान बनाए गए, लेकिन उनका समय पर निराकरण नहीं हो पाने से स्थिति चिंताजनक बन गई है। वर्तमान में करीब छह लाख ई-चालान जिला एवं सत्र न्यायालय में लंबित बताए जा रहे हैं। इससे न केवल अदालत का कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन चालानों के निराकरण के लिए गठित विशेष अदालत के न्यायाधीश का तबादला हो चुका है और अभी तक नई नियुक्ति नहीं की गई है। परिणामस्वरूप चालान से जुड़े मामलों का निपटारा पूरी तरह ठप पड़ गया है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग अदालत पहुंच रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होने के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।

आईटीएमएस कैमरों से बढ़े चालान

शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाए गए आईटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) कैमरों के जरिए ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर स्वतः कार्रवाई की जा रही है। रेड सिग्नल तोड़ना, बिना हेलमेट वाहन चलाना, सीट बेल्ट नहीं लगाना और अन्य नियम तोड़ने पर कैमरे वाहन नंबर पहचानकर ऑटोमैटिक ई-चालान जनरेट कर रहे हैं।

ये चालान वाहन मालिकों के मोबाइल नंबर या पते पर भेजे जाते हैं। हालांकि बड़ी संख्या में लोगों ने इन चालानों का भुगतान नहीं किया। ट्रैफिक पुलिस ने निर्धारित समय तक जुर्माना जमा नहीं होने पर इन मामलों को अदालत भेजना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे चालानों की संख्या इतनी बढ़ गई कि अब यह आंकड़ा छह लाख के पार पहुंच चुका है।

सूत्रों के अनुसार, हर दिन सैकड़ों नए चालान कोर्ट भेजे जा रहे हैं, जबकि पुराने मामलों का निराकरण लगभग बंद है। इससे लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

विशेष कोर्ट में काम ठप

इन मामलों की सुनवाई और निराकरण के लिए विशेष अदालत बनाई गई थी, लेकिन वहां पदस्थ न्यायाधीश के ट्रांसफर के बाद स्थिति और बिगड़ गई। नई नियुक्ति नहीं होने से चालान जमा करने या कानूनी प्रक्रिया पूरी करने पहुंचे लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

अधिवक्ता Shailendra Dwivedi के अनुसार, जो लोग समय पर ट्रैफिक थाने में चालान जमा नहीं कर पाए, अब उन्हें अदालत की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। कोर्ट में लंबित मामलों के कारण उन्हें कई बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कई मामलों में मूल चालान राशि के साथ अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है। अदालत जाने पर लोगों को वकीलों की फीस भी चुकानी पड़ रही है, जिससे आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

वाहन खरीदने-बेचने वालों की बढ़ी परेशानी

ई-चालानों की सबसे ज्यादा मार पुराने वाहन खरीदने और बेचने वाले लोगों पर पड़ रही है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक वाहन पर लंबित चालान जमा नहीं होंगे, तब तक वाहन का नामांतरण (ट्रांसफर) नहीं किया जाएगा।

ऐसे में जिन लोगों ने सेकंड हैंड वाहन खरीदे हैं, वे सबसे अधिक परेशान हैं। कई बार पुराने मालिक के नाम पर बने चालानों की जानकारी नए खरीदार को नहीं होती। लेकिन जब वाहन ट्रांसफर कराने आरटीओ पहुंचते हैं, तब लंबित चालानों का पता चलता है।

कई मामलों में वाहन बेचने वाले और खरीदने वाले के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही है। लोगों का कहना है कि वाहन खरीदने से पहले सभी चालानों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।

रोज कोर्ट पहुंच रहे लोग

अदालत परिसर में रोज बड़ी संख्या में लोग चालान जमा करने और जानकारी लेने पहुंच रहे हैं। लेकिन विशेष कोर्ट में न्यायाधीश नहीं होने के कारण उन्हें कोई समाधान नहीं मिल पा रहा। कई लोग दूर-दराज इलाकों से समय और पैसा खर्च कर अदालत पहुंचते हैं, लेकिन बिना काम के लौटना पड़ता है।

कुछ नागरिकों का कहना है कि ऑनलाइन चालान व्यवस्था शुरू तो कर दी गई, लेकिन उसके निराकरण के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं बनाई गईं। यदि समय रहते अतिरिक्त कोर्ट या डिजिटल भुगतान की मजबूत व्यवस्था की जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

हाई कोर्ट की नाराजगी के बावजूद जारी कार्रवाई

शहर में ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। सड़क जाम और यातायात व्यवस्था सुधारने के बजाय व्यस्त समय में वाहन चालकों को रोककर चालान बनाने की कार्रवाई पर Madhya Pradesh High Court नाराजगी जाहिर कर चुका है।

हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ऑफिस, दुकान और कामकाज के समय लोगों को रोककर चालान बनाना ट्रैफिक व्यवस्था को और बिगाड़ता है। इसके बावजूद चालान बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी है।

लोगों का आरोप है कि कई बार ट्रैफिक पुलिस का फोकस यातायात सुधारने से ज्यादा चालान बनाने पर रहता है। इससे सड़क पर विवाद और तनाव की स्थिति बन जाती है।

कार्रवाई के दौरान विवाद भी बढ़े

हाल के दिनों में ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई विवाद सामने आए हैं। एक घटना में हेलमेट नहीं पहनने पर दो युवतियों को रोकने की कोशिश की गई। आरोप है कि पुलिसकर्मी द्वारा अचानक पकड़ने की कोशिश के दौरान संतुलन बिगड़ने से दोनों युवतियां बाइक सहित गिर गईं और उन्हें चोटें आईं।

इसी तरह महू नाका चौराहे पर एक भाजपा नेता के साथ ट्रैफिक पुलिसकर्मी द्वारा कथित रूप से थप्पड़ मारने का मामला भी चर्चा में रहा। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।

आए दिन ट्रैफिक जांच के दौरान वाहन चालकों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस और झड़प की घटनाएं सामने आती रहती हैं। नागरिकों का कहना है कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान व्यवहार और प्रक्रिया भी संतुलित होनी चाहिए।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

छह लाख लंबित चालानों का मामला अब प्रशासनिक चुनौती बन चुका है। यदि जल्द नई नियुक्ति नहीं हुई और निराकरण प्रक्रिया तेज नहीं की गई, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और न्याय विभाग को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए। अतिरिक्त विशेष अदालतें बनाई जाएं, ऑनलाइन भुगतान और सुनवाई की व्यवस्था मजबूत की जाए तथा पुराने मामलों का त्वरित निराकरण किया जाए।

साथ ही ट्रैफिक पुलिस को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्रवाई केवल चालान बनाने तक सीमित न रहे, बल्कि सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार पर भी समान ध्यान दिया जाए। तभी ई-चालान व्यवस्था का उद्देश्य सफल माना जाएगा।

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