पीटीएस सागर में दो दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण संपन्न, पुलिस अधिकारियों को बनाया गया “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” के रूप में सक्षम !

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पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय (पीटीएस) सागर में अराजपत्रित पुलिस अधिकारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) रवि कुमार गुप्ता एवं पुलिस अधीक्षक पीटीएस सागर लवली सोनी के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को आपदा की स्थिति में प्रथम प्रत्युत्तरदाता (First Responder) के रूप में तैयार करना तथा उनमें त्वरित निर्णय लेने और राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने की क्षमता विकसित करना रहा।

दो दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं की पहचान, बचाव कार्य, प्राथमिक चिकित्सा, फायर सेफ्टी, जल आपदा प्रबंधन तथा घायलों के सुरक्षित रेस्क्यू जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण के प्रथम चरण में आपदा प्रबंधन विभाग एसव्हीएन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ ए.के. सिंह एवं उनकी टीम ने अधिकारियों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में भूकंप, बाढ़, आगजनी, सड़क दुर्घटनाएं, भवन ध्वस्त होना और रासायनिक हादसे जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए पुलिस बल को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित होना बेहद आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने फायर सेफ्टी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हुए बताया कि किसी भी आगजनी की घटना में शुरुआती कुछ मिनट सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पुलिस अधिकारी तत्काल सही निर्णय लें और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करें तो जनहानि और नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान आग बुझाने के प्राथमिक तरीकों, अग्निशामक यंत्रों के उपयोग तथा भीड़ नियंत्रण की तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया।

इसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मकरोनिया के चिकित्सा अधिकारी दीपक दुबे द्वारा पुलिस अधिकारियों को जीवन रक्षक प्राथमिक चिकित्सा एवं सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस सत्र में अधिकारियों को बताया गया कि किसी व्यक्ति के हृदय की धड़कन बंद होने या सांस रुकने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनटों में दिया गया सीपीआर किसी की जान बचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

डॉ. दुबे ने डमी मॉडल के माध्यम से पुलिसकर्मियों को सीपीआर देने की सही तकनीक सिखाई। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं या अन्य हादसों में घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाने से पहले दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने स्वयं अभ्यास कर विभिन्न जीवन रक्षक प्रक्रियाओं को समझा।

कोर्स के दूसरे दिन राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की प्लाटून कमांडर समीक्षा श्रीधर एवं उनकी टीम ने आपदा की परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों का जीवंत प्रदर्शन किया। इस दौरान घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की तकनीकों, सीमित संसाधनों में तात्कालिक स्ट्रेचर तैयार करने तथा जल आपदा के दौरान स्थानीय सामग्री की सहायता से फ्लोटिंग डिवाइस बनाने के तरीके सिखाए गए।

एसडीआरएफ टीम द्वारा किए गए प्रदर्शन ने उपस्थित अधिकारियों को यह समझाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी सूझबूझ और प्रशिक्षण के बल पर कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने रस्सियों, कपड़ों और अन्य उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर तत्काल राहत उपकरण तैयार करने का अभ्यास भी किया।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि किसी भी आपदा की स्थिति में पुलिस की भूमिका केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि राहत एवं बचाव कार्यों में भी पुलिस सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाली एजेंसी होती है। ऐसे में पुलिस बल का प्रशिक्षित और संवेदनशील होना अत्यंत आवश्यक है।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी बन चुका है। पुलिस अधिकारी यदि तकनीकी रूप से दक्ष होंगे तो वे आम नागरिकों में भी सुरक्षा और विश्वास का वातावरण निर्मित कर सकेंगे।

अंत में निरीक्षक अफरोज खान द्वारा सभी विशेषज्ञों, प्रशिक्षकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ-साथ आपदा के समय त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दो दिवसीय इस कार्यशाला ने पुलिस अधिकारियों को न केवल तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया कि आपदा की घड़ी में मानवीय संवेदनाओं के साथ कैसे कार्य किया जाए। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई।

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