मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में सागर-कानपुर फोरलेन सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनी के एक फील्ड ऑफिसर के अपहरण और फिरौती का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपियों ने अधिकारी का अपहरण कर 50 लाख रुपए की फिरौती मांगी। कंपनी द्वारा दबाव में आकर 10 लाख रुपए आरोपियों के खाते में ट्रांसफर करने के बाद भी अधिकारी को नहीं छोड़ा गया। बाद में पुलिस ने रातभर जंगल में सर्चिंग कर अधिकारी को सुरक्षित बरामद कर लिया।
जानकारी के अनुसार सागर-कानपुर फोरलेन सड़क निर्माण का कार्य कर रही MKC Infrastructure कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय सोढ़ी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि कंपनी के फील्ड ऑफिसर रामखिलाड़ी शर्मा निवासी मुरैना का बुधवार दोपहर अपहरण कर लिया गया।

शिकायत के मुताबिक आरोपी भान सिंह यादव, विशाल यादव और उनके एक अन्य साथी ने पहले रामखिलाड़ी शर्मा के साथ मारपीट की और फिर उन्हें जबरन अपने साथ ले गए। इसके बाद आरोपियों ने कंपनी से 50 लाख रुपए की फिरौती की मांग की।
बताया जा रहा है कि अपहृत अधिकारी को छोड़ने के नाम पर आरोपियों ने कंपनी पर लगातार दबाव बनाया। स्थिति गंभीर होने पर कंपनी ने दो किश्तों में 5-5 लाख रुपए आरोपियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद आरोपियों ने अधिकारी को रिहा नहीं किया।
सामने आए सीसीटीवी फुटेज
घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं। फुटेज में आरोपी कंपनी के ऑफिस पहुंचते और अपहरण की घटना को अंजाम देते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस इन फुटेज को जांच का अहम आधार मानकर आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

जंगल में रातभर चली सर्चिंग
मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने अपहरण और फिरौती का केस दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और परिजनों-दोस्तों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने सटई थाना क्षेत्र के जंगलों में घेराबंदी की।
देर रात पुलिस टीम ने जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाकर रामखिलाड़ी शर्मा को सुरक्षित बरामद कर लिया। हालांकि अंधेरे और पहाड़ी क्षेत्र का फायदा उठाकर मुख्य आरोपी मौके से फरार हो गए।
पुलिस ने संदेह के आधार पर एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। वहीं दोनों मुख्य आरोपियों के खिलाफ अपहरण, फिरौती और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है।
बैंक खाता फ्रीज कराया गया
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस बैंक खाते को भी फ्रीज करा दिया है, जिसमें फिरौती के 10 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि इससे आरोपियों द्वारा रकम निकाले जाने पर रोक लग सकेगी।
मिट्टी सप्लाई विवाद बना वजह
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरा विवाद मिट्टी सप्लाई के भुगतान को लेकर शुरू हुआ था। आरोपी फोरलेन निर्माण कार्य के लिए कंपनी को मिट्टी सप्लाई करते थे।

आरोपियों का दावा था कि इस काम में उन्हें करीब 50 हजार रुपए का नुकसान हुआ है। इसी विवाद के चलते उन्होंने कथित तौर पर कंपनी के अधिकारी का अपहरण कर 50 लाख रुपए की मांग कर डाली।
भतीजे ने बताई पूरी घटना
अपहृत अधिकारी के भतीजे सचिन शर्मा ने बताया कि उनके चाचा का अपहरण 13 मई की दोपहर करीब 12 बजे हुआ था। वे गुरुवार सुबह करीब 5 बजे सटई थाना क्षेत्र के जंगलों में मिले।
उन्होंने बताया कि सुबह 5:26 बजे उनके चाचा ने दूसरे चाचा भगीरथ शर्मा के फोन पर कॉल कर 10 लाख रुपए देने की बात कही थी। इसके बाद आरोपियों के बताए खातों में दो बार में 5-5 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। Jeetu Patwari ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छतरपुर की यह घटना प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि अपहरणकर्ताओं के खातों में 10 लाख रुपए ट्रांसफर होने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं और इससे पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने जिले में सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कंपनियों से जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जिस तरह दिनदहाड़े एक कंपनी अधिकारी का अपहरण कर फिरौती मांगी गई, उससे स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया जाएगा।