उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में सोमवार को परीक्षा के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया, जहां बीकॉम 6वें सेमेस्टर की परीक्षा में एक छात्रा की जगह दूसरी छात्रा परीक्षा देती पकड़ी गई। इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और सॉल्वर गैंग की सक्रियता की आशंका भी बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार, स्कूल ऑफ स्टडीज इन कॉमर्स में चल रही परीक्षा के दौरान सपना भदौरिया की जगह इंदौर से आई एक युवती परीक्षा देती हुई पकड़ी गई। जांच के दौरान अधिकारियों ने जब कक्ष क्रमांक 10 की A-1 सीट पर बैठी छात्रा के दस्तावेज और फोटो का मिलान किया, तो उसमें गड़बड़ी सामने आई। पूछताछ में छात्रा ने अपना नाम प्रिशा साहू बताया और कहा कि वह इंदौर की रहने वाली है और बीटेक की छात्रा है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एनएसयूआई के विश्वविद्यालय अध्यक्ष तरुण परिहार को पहले से ही इस तरह की गड़बड़ी की सूचना मिली थी। उन्होंने तुरंत वागदेवी भवन स्थित परीक्षा केंद्र पर अधिकारियों को सतर्क किया, जिसके बाद जांच की गई और यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। वहीं, असली छात्रा सपना भदौरिया से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला, जिससे संदेह और गहरा गया।

पूछताछ में प्रिशा साहू ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि उसकी पहचान ऋषभ नाम के युवक से है, जिसने अपनी बहन सपना भदौरिया की जगह उसे परीक्षा देने के लिए बुलाया था। प्रिशा के मुताबिक, सपना ने उस पर दबाव बनाया और कहा कि “फिलहाल परीक्षा दे दो, बाकी डील बाद में समझ लेंगे।” इसके अलावा उसे यह भी भरोसा दिलाया गया कि इस तरह का काम पहले भी कई बार किया जा चुका है, इसलिए कोई समस्या नहीं आएगी।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि बीटेक की छात्रा होने के बावजूद प्रिशा बीकॉम का पेपर देने बैठ गई। उसने बताया कि उसे सिर्फ परीक्षा हॉल में बैठकर कॉपी में कुछ भी लिखने के लिए कहा गया था और बाकी व्यवस्था संभालने का भरोसा दिया गया था। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ एक छात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित सॉल्वर गैंग सक्रिय हो सकता है।

घटना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज मौके पर पहुंचे और इसे बेहद गंभीर मामला बताया। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक को तुरंत विधि अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। फिलहाल आरोपी छात्रा को परीक्षा नियंत्रक कक्ष में बैठाकर पूछताछ की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे मामले को अब पुलिस के हवाले करने की तैयारी में है और उज्जैन के माधव नगर थाना में केस दर्ज कराया जा सकता है। इस घटना के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि शिक्षा व्यवस्था में फर्जीवाड़ा और सॉल्वर गैंग किस हद तक सक्रिय हो चुके हैं। अब जरूरत है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए और परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और भी मजबूत की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।