उपार्जन केंद्रों पर सख्ती: निरीक्षण में वारदाना की कमी उजागर, अनाज सुरक्षा के दिए गए निर्देश !

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सागर। जिले में समर्थन मूल्य पर चल रही खरीदी व्यवस्था को सुचारु, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देशन में अधिकारियों द्वारा उपार्जन केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का जायजा लेकर आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जा सकें। इसी क्रम में शाहगढ़ क्षेत्र अंतर्गत दलपतपुर समिति सहित अन्य केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जहां व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ-साथ आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

निरीक्षण के दौरान दलपतपुर समिति में किसानों के लिए की गई व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। केंद्र पर छाया और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध थीं, जिससे दूर-दराज से आने वाले किसानों को राहत मिल रही है। प्रशासन ने इन व्यवस्थाओं को बनाए रखने और और बेहतर करने के निर्देश भी दिए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। हालांकि निरीक्षण के दौरान चना और मसूर उपार्जन केंद्र पर वारदाना (बोरियों) की कमी की स्थिति सामने आई, जिसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने संबंधित विभाग को तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वारदाना की कमी के कारण खरीदी कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।

इसके बाद अधिकारियों ने नहरमऊ गोदाम अंतर्गत नहरमऊ समिति का भी निरीक्षण किया, जहां स्व-सहायता समूह “जय माता दी” द्वारा गेहूं उपार्जन का कार्य संचालित किया जा रहा है। यहां उपार्जन प्रक्रिया सुव्यवस्थित पाई गई, जिससे प्रशासन ने संतोष व्यक्त किया। हालांकि व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने कुछ सुधारात्मक सुझाव भी दिए, ताकि कार्य और अधिक प्रभावी और सुचारु रूप से संचालित हो सके। यह देखा गया कि समूह द्वारा अनुशासित ढंग से कार्य किया जा रहा है, जो अन्य समितियों के लिए भी एक अच्छा उदाहरण बन सकता है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने आगामी दिनों में संभावित मौसम परिवर्तन और वर्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी गेहूं, चना और मसूर की उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखें। खुले में रखे गए अनाज को तिरपाल या अन्य साधनों से ढककर सुरक्षित रखने की सलाह दी गई, ताकि अचानक होने वाली बारिश से फसल को नुकसान न पहुंचे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि थोड़ी सी लापरवाही किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए समय रहते सुरक्षा के उपाय अपनाना आवश्यक है।

इसके साथ ही मंडी प्रभारियों और उपार्जन समितियों के सदस्यों को सख्त निर्देश दिए गए कि उपार्जन केंद्रों पर अनाज के सुरक्षित भंडारण के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तुरंत सुनिश्चित की जाएं। तिरपाल, शेड और अन्य संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में नुकसान से बचा जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यदि कहीं भी लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे इन सतत निरीक्षणों का मुख्य उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह व्यवस्थित बनाए रखना है। यह प्रयास सुनिश्चित करता है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिले और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही, प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के उपायों को प्राथमिकता देना प्रशासन की दूरदर्शिता को भी दर्शाता है।

कुल मिलाकर, कलेक्टर प्रतिभा पाल के नेतृत्व में जिला प्रशासन उपार्जन केंद्रों की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर और सजग है। लगातार निरीक्षण, समय पर निर्देश और सुधारात्मक कदम यह संकेत देते हैं कि प्रशासन किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले दिनों में यदि इसी तरह निगरानी और तत्परता बनी रही, तो न केवल खरीदी प्रक्रिया और अधिक सुचारु होगी, बल्कि किसानों का भरोसा भी प्रशासन पर और मजबूत होगा।

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